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Kanpur: ऑडिट में सब ठीक…लोकपाल की रिपोर्ट में 21 लाख का फर्जीवाड़ा, जांच के बाद दोषियों पर होगी कार्रवाई

Sun, 26 Oct 2025 11:35 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: बिल्हौर ब्लॉक की सैबसू और रहीमपुर करीमपुर ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों की लोकपाल जांच में करीब 21 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आया है। यह घोटाला तब उजागर हुआ जब ऑडिटरों ने अपनी रिपोर्ट में सब ठीक बताया था।
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मनरेगा में फर्जीवाड़ा - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कानपुर में मनरेगा कार्यों के नाम पर जमकर फर्जीवाड़ा हो रहा है। बिल्हौर ब्लाॅक की सैबसू और रहीमपुर करीमपुर ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्य में फर्जीवाड़े की शिकायत हुई तो लोकपाल ने जांच की। दोनों ग्राम पंचायतों में करीब 21 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा निकला, जबकि ऑडिटर की रिपोर्ट में सब ठीकठाक मिला था। शासन के नियमानुसार, प्रत्येक वर्ष मनरेगा कार्यों का ऑडिट कराया जाता है। यह ऑडिट गांवों में रहने वाले युवाओं का डीडीओ साक्षात्कार के माध्यम से चयन करने वाले ऑडिटर करते हैं। प्रत्येक दो साल में इनका चयन किया जाता है।

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इसके बाद इन्हें अलग-अलग ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्यों का सत्यापन के लिए भेजा जाता है। एक वर्ष में जो भी कार्य मनरेगा से ग्राम पंचायतों में कराए जाते हैं उसकी ग्राम पंचायत स्तर की रिपोर्ट सोशल ऑडिटरों को दी जाती है। उसी आधार पर वह गांव-गांव जाकर हर काम को देखते हैं। मौके पर जो काम नहीं मिलता है उसकी रिपोर्ट तैयार करते हैं। इसके बाद सभी ऑडिटर ग्राम पंचायत की रिपोर्ट के साथ अपनी सत्यापित रिपोर्ट जिले में बैठे जिला कोऑर्डिनेटर अमित गुप्ता को सौंपते हैं। वह दोनों रिपोर्ट के अनुसार खामियों को उजागर करते हुए उपायुक्त मनरेगा को भेजते हैं।

सत्यापन रिपोर्ट बनाकर प्रस्तुत कर रहे
इनको दुरुस्त कराने का काम मनरेगा उपायुक्त की होती है। इन सभी कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी जिला विकास अधिकारी की होती है। दोनों ग्राम पंचायतों की सोशल ऑडिट की सत्यापित रिपोर्ट की अमर उजाला टीम ने पड़ताल की तो पता चला कि लोकपाल को रहीमपुर करीमपुर ग्राम पंचायत में मनरेगा के 13 कार्यों की जांच की तो चार काम ही मौके पर मिले। ऑडिटरों ने अपनी जांच रिपोर्ट में सिर्फ एमबी न मिलने और पंचायत रिपोर्ट में फोटो न लगाने की बात का जिक्र किया। इसी तरह से सैबसू के कार्यों की रिपोर्ट बताई। इससे साफ जाहिर होता है कि सोशल ऑडिट टीम भी प्रधान और सचिव के अनुसार अपनी सत्यापन रिपोर्ट बनाकर प्रस्तुत कर रहे।

लोकपाल की जांच में खुला फर्जीवाड़ा
डीएम ने लोकपाल से जांच कराई तो सैबसू ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत 17 काम सिर्फ कागजों में दिखाकर करीब 4,59,549 रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया। इसी तरह रहीमपुर करीमपुर ग्राम पंचायत में 13 मनरेगा कार्यों में एक भी काम नहीं कराया गया। इसके साथ दूसरे ग्राम पंचायतों के मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाकर करीब 17 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया है। हालांकि लोकपाल की जांच रिपोर्ट के आधार पर सैबसू की जांच जिलास्तरीय अधिकारी ने की है। अभी रहीमपुर करीमपुर की जांच बाकी है। सैबसू की जांच रिपोर्ट जल्द टीम सीडीओ को सौंपेगी।
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सोशल आडिट की रिपोर्ट जिला कोआर्डिनेटर कंपाइल करता है। वह खामियों को बताते हुए उपायुक्त मनरेगा को रिपोर्ट भेजता है। खामियों को बीडीओ स्तर से सही कराया जाता है लेकिन सोशल ऑडिट रिपोर्ट में इन ग्राम पंचायतों में ऐसा कुछ नहीं बताया था। इसकी जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी।  -आलोक कुमार, परियोजना निदेशक
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