सत्यापन रिपोर्ट बनाकर प्रस्तुत कर रहे
इनको दुरुस्त कराने का काम मनरेगा उपायुक्त की होती है। इन सभी कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी जिला विकास अधिकारी की होती है। दोनों ग्राम पंचायतों की सोशल ऑडिट की सत्यापित रिपोर्ट की अमर उजाला टीम ने पड़ताल की तो पता चला कि लोकपाल को रहीमपुर करीमपुर ग्राम पंचायत में मनरेगा के 13 कार्यों की जांच की तो चार काम ही मौके पर मिले। ऑडिटरों ने अपनी जांच रिपोर्ट में सिर्फ एमबी न मिलने और पंचायत रिपोर्ट में फोटो न लगाने की बात का जिक्र किया। इसी तरह से सैबसू के कार्यों की रिपोर्ट बताई। इससे साफ जाहिर होता है कि सोशल ऑडिट टीम भी प्रधान और सचिव के अनुसार अपनी सत्यापन रिपोर्ट बनाकर प्रस्तुत कर रहे।
लोकपाल की जांच में खुला फर्जीवाड़ा
डीएम ने लोकपाल से जांच कराई तो सैबसू ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत 17 काम सिर्फ कागजों में दिखाकर करीब 4,59,549 रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया। इसी तरह रहीमपुर करीमपुर ग्राम पंचायत में 13 मनरेगा कार्यों में एक भी काम नहीं कराया गया। इसके साथ दूसरे ग्राम पंचायतों के मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाकर करीब 17 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया है। हालांकि लोकपाल की जांच रिपोर्ट के आधार पर सैबसू की जांच जिलास्तरीय अधिकारी ने की है। अभी रहीमपुर करीमपुर की जांच बाकी है। सैबसू की जांच रिपोर्ट जल्द टीम सीडीओ को सौंपेगी।
सोशल आडिट की रिपोर्ट जिला कोआर्डिनेटर कंपाइल करता है। वह खामियों को बताते हुए उपायुक्त मनरेगा को रिपोर्ट भेजता है। खामियों को बीडीओ स्तर से सही कराया जाता है लेकिन सोशल ऑडिट रिपोर्ट में इन ग्राम पंचायतों में ऐसा कुछ नहीं बताया था। इसकी जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी। -आलोक कुमार, परियोजना निदेशक