तकनीक के बढ़ते दौर में तकनीक पर आंख बंद कर भरोसा करना छत्रपति शाहूजी महाराज विवि की एक शिक्षिका को भारी पड़ गया। शिक्षिका ने चैटबॉट की मदद से छात्रों के प्रश्नपत्र तैयार किए। चैटबॉट शिक्षिका के कमांड को ठीक से समझ नहीं पाया और सवाल रिपीट कर दिए। शिक्षिका ने भी बिना देखे प्रश्नपत्र का प्रिंट निकालकर छात्रों को बांट दिया। प्रश्नपत्र देखते ही छात्रों के होश उड़ गए। मामला कुलपति तक पहुंचा तो शिक्षिका ने अपनी गलती मानते हुए स्वयं ही इस्तीफा दे दिया। विवि प्रशासन ने प्रोफेसर का इस्तीफा स्वीकार कर उनको कार्यमुक्त कर दिया है।
विवि की कैंपस परीक्षाओं के पेपर शिक्षक स्वयं पेपर तैयार करते हैं। विवि के स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज में सेमेस्टर परीक्षाएं चल रही हैं। स्कूल की असिस्टेंट प्रोफेसर ने लैंग्वेज का पेपर तैयार किया और छात्रों को बांट दिया। जब छात्रों ने देखा तो पेपर में कई सवाल रिपीट थे। छात्रों ने शिकायत कक्ष निरीक्षक से की। मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा। पूछताछ में शिक्षिका ने स्वीकार किया कि चैटबॉट की मदद से पेपर तैयार किया था। कार्य अधिक होने की वजह से प्रश्नपत्र को बिना देखे ही छात्रों को बांट दिया। मामले को बढ़ता और भय के चलते शिक्षिका ने स्वयं ही इस्तीफा दे दिया।
विवि के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि किसी भी एआई टूल को सही प्रॉम्पट नहीं देंगे तो ऐसी गड़बड़ी होगी। शिक्षिका ने भी यही किया। उनकी कई स्तर पर गलतियां रहीं। पहले तो चैटबॉट से पेपर बनाया, गलत प्राॅम्पट, सबसे बड़ी बात पेपर छात्रों को देने से पहले उसकी प्रूफरीडिंग न करना। विवि के पास अपना एआई टूल है जिसकी मदद से पता चला कि पेपर चैटबॉट से तैयार किया गया है। प्रो. पाठक ने कहा कि शिक्षिका ने स्वयं ही इस्तीफा दे दिया है।