यदि फली छेदक कीट पर समय पर नियंत्रण नहीं किया जाता है तो पैदावार में लगभग 50 से 60 प्रतिशत तक का नुकसान हो जाता है। कीट फली लगने पर उनमें छेद कर दानों को खोखला कर देता है।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कीट विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. वाईपी मलिक ने सोमवार को चने की फसल को फली छेदक कीट से बचाने के लिए एडवाइजरी जारी की।
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उन्होंने बताया कि यदि फली छेदक कीट पर समय पर नियंत्रण नहीं किया जाता है तो पैदावार में लगभग 50 से 60 प्रतिशत तक का नुकसान हो जाता है। कीट फली लगने पर उनमें छेद कर दानों को खोखला कर देता है।
किसान चने की फसल में 50 प्रतिशत फूल आने पर एनपीबी 250 एलई दवा की एक मिलीलीटर मात्रा को पानी में घोलकर छिड़काव कर दें। 15 दिन बाद प्रति हेक्टेयर में बीटी दवा का छिड़काव करें या 50 प्रतिशत फूल आने पर 700 मिलीलीटर नीम के तेल का घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव कर दें।