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Kanpur Accident: सिर और सीने की टूटी मिली हड्डियां, अधिक रक्तस्त्राव बना मौत की वजह, गठरी बनी कार से निकले शव

Tue, 15 Oct 2024 10:21 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: पनकी में बीटेक के दो छात्र-दो छात्राओं और चालक की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भयावहता का खुलासा भी हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेड इंजरी निकली। सिर, हाथ, पैर, सीने में चोट और आंतरिक रक्तस्त्राव से जान जाने की बात सामने आई।
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kanpur road accident - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में हाईवे पर वाहनों का उचित दूरी न बनाकर चलने की भूल सोमवार को पांच परिवारों की खुशियां लूट ले गई। कम दूरी होने से आगे चल रहे डंपर के ब्रेक लगाने पर ऑल्टो कार उसमें जा घुसी और पीछे आ रहे सरिया लदे ट्रॉला ने ऐसी टक्कर मारी कि कार दोनों बड़े वाहनों के बीच पिचककर गठरी बन गई। कार सवार पीएसआईटी के चार बीटेक छात्रों और ड्राइवर की मौके पर ही मौत हो गई।

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दर्दनाक हादसे में पीएसआईटी के दो छात्र प्रतीक सिंह उर्फ अनुज, सतीश सिंह, दो छात्राएं आयुषी पटेल, गरिमा त्रिपाठी और चालक विजय साहू का देर शाम तक पोस्टमार्टम चला। ऑल्टो कार में चालक विजय और छात्र प्रतीक आगे बैठे थे। इस कारण सबसे ज्यादा इन दोनों को चोट हैं। सिर और सीने में कार के पार्टस घुस जाने पर 10 से ज्यादा हड्डियां टूटी मिली।

सीने में चोट और आंतरिक रक्तस्त्राव से जान चली गई
वहीं, आंतरिक रक्तस्त्राव मौत होने का कारण बना। वहीं सतीश सिंह, आयुषी पटेल और गरिमा त्रिपाठी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेड इंजरी निकली सिर, हाथ, पैर, सीने में चोट और आंतरिक रक्तस्त्राव से जान चली गई। सभी परिजन अपने-अपने बच्चों का शव लेकर घर रवाना हो गए। यहां इलाके में घर के बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई। महिलाओं और बच्चों की रोने की आवाजें पूरी पूरे में गूंज रहीं थी। घर के पुरुष भी आंसू रोककर रुंधे गले अपने ऊपर टूटे दुख को बयां करते नजर आए।

दहशत भरे दिखे मृतकों के चेहरे
पनकी में इस हादसे की दहशत मृतकों के चेहरे पर साफ दिखाई दी। दरअसल जब शव हैलट अस्पताल लाए गए तो सभी की मुट्ठियां भिंची हुई थीं। दर्द और परेशानी के भाव सभी के चेहरे पर दिखाई दे रहे थे। कार की छत और सीट एक हो गई थी। लिहाजा जाहिरा चोटें भी सभी के चेहरे पर थीं। दर्द और छटपटाहट के मिश्रित भाव चेहरों पर दिखाई दिए, जिसे देख परिवार वाले भी दहल गए।

बवाल की आशंका को लेकर तैनात रहा फोर्स
सड़क हादसे में एक साथ कार सवार पांच लोगों की मौत के बाद कमिश्नरेट पुलिस अलर्ट हो गई। पनकी घटनास्थल से लेकर, मृतकों के घर, पोस्टमार्टम और हैलट अस्पताल में भारी पुलिस बल पहुंच गया। किसी प्रकार का कोई हंगामा बवाल न हो इसके लिए पीएसी भी तैनात कर दी गई। सभी घूम-घूम कर टोह लेते नजर आए।

बैग और किताबें देख संस्थान में दी जानकारी
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने कार में खून से सनी बैग और यूनीफार्म देखकर पीएसआईटी प्रबंधन को सूचना दी। इसके बाद संस्थान के स्टाफ ने मौके पर पहुंचकर चारों की पहचान करने के साथ ही परिजनों को जानकारी दी। हादसे की सूचना पर एक-एक कर हैलट पहुंचे परिजन अपने बच्चों को शव देख बिलख पड़े। परिजनों को रो-रोकर बुरा हाल था। एक ही मोहल्ले के पांच लोगों की मौत की खबर सुनकर घर में कोहराम मच गया।

हादसे से चंद मिनट पहले प्रतीक ने ममेरी बहनों से की थी बात
छात्र प्रतीक के पिता राजेश मूल रूप से गांव जरकला बिधनू के निवासी हैं। प्रतीक के मामा उन्नाव निवासी अमर पाल ने बताया कि दशहरे की छुट्टी के चलते उनकी भतीजियां शिवानी, नेहा और भतीजा सचिन सनिगवां ही प्रतीक के घर आए हुए थे। सभी चार दिन से एक साथ थे। सोमवार सुबह जब प्रतीक कार से कॉलेज के लिए निकला तो भतीजा और भतीजियां भी उन्नाव (अपने घर ) के लिए चल पड़े थे। बताया गया कि प्रतीक ने हादसे से कुछ देर पहले ही बहनों को फोन कर उनके सुरक्षित पहुंच जाने की बात पूछी थी, तू बहनों के पूछने पर प्रतीक भी बोला था कि बस कॉलेज पहुंचने ही वाला है। बस इसके चंद मिनटों बाद ही हादसा हो गया। ममेरी बहनों का कहना है कि प्रतीक के वे आखिरी शब्द अभी भी कानों में मानो गूंज रहे हो, हादसे पर यकीन नहीं हो रहा है।

नवंबर में गरिमा का तो दिसंबर में होना था आयुषी का जन्मदिन
मूलरूप से बिंदकी निवासी गरिमा के पिता भरत कुमार त्रिपाठी इटावा में टीएसआई हैं। हादसे की जानकारी पर वह भी घर पहुंचे। छोटे भाई कुशाग्र और बहन महिमा ने बताया कि दीदी गरिमा का जन्मदिन 28 नवंबर को मनाना था। सभी ने मिलकर अभी से तैयारी शुरू कर दी थी। वहीं, आयुषी के मामा नौबस्ता निवासी धर्मेंद्र उमराव ने बताया कि भांजी का जन्मदिन 30 दिसंबर को होना था। आयुषी का परिवार भी मूलरूप से दरियापुर (फतेहपुर) निवासी है।

दिवाली से पहले बुझे परिवारों के दीपक
एक ही मोहल्ले से पांच लोगों की मौत ने सभी को स्तब्ध कर दिया। जहां कल तक दशहरे और दिवाली की खुशियां नजर आ रहीं थी, उसी मोहल्ले में सोमवार को हर एक की आंख नम थी। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि सुबह उनकी आंखों के सामने जो बच्चे हंसते खेलते घर से निकले थे। उन्हीं के शव देर शाम तक एंबुलेंस से आते रहे। हर एक की जुबान पर यही चर्चा रही कि दीपावली से पहले ही चारों घरों के दीपक बुझ गए।

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यूपीएससी की तैयारी करना चाहता था सतीश
मृतक छात्र सतीश दो भाइयों में छोटा था। सतीश के ताऊ हुसैना फतेहपुर निवासी सुधीर सिंह ने बताया कि सतीश बीटेक के बाद यूपीएससी करना चाहता था। बेटे की मौत की खबर सुनकर मां संतोष कुमार का रो रोकर बुरा हाल था।

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