दोनों मामलों में लेखपाल को पाया गया था दोषी
जांच के दौरान पता चला कि जोत चकबंदी अधिनियम के तहत अधिसूचित ग्रामों में धारा 24 से पूर्व किसी जमीन की नाप व कब्जा परिवर्तन का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद लेखपाल ने मनमाने ढंग से जमीन की नापकर अवैध रूप से कब्जा दिलाया दिया। वहीं, एक वरासत के मामले को बिना किसी कारण के लंबित रखा गया। दोनों मामलों में लेखपाल को दोषी पाया गया था।