डॉक्टरों के व्यवहार को लेकर भी शिकायतें सामने आ रहीं
मरीजों और उनके परिजनों के साथ स्टाफ तथा जूनियर डॉक्टरों के व्यवहार को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं। सबसे गंभीर आरोप अस्पताल में बाहर से जांचें और दवाइयां लिखने की हैं। पिछले महीने दो कर्मचारी भी पकड़े गए थे जो मरीजों के सैंपल लेकर निजी लैब जांच के लिए जा रहे थे। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए एक कर्मचारी को हटा दिया था, जबकि दूसरा शिकायत के बाद से ड्यूटी पर नहीं आया।
डॉ. मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल
- फोटो : amar ujala
डीओपीआर दर्ज करने का दबाव बनाया जा रहा
मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तुरंत परिसर में ही जांच की व्यवस्था शुरू कर दी थी। वहीं मरीजों का बिना बताए अस्पताल से निकल जाना सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहा है। अस्पताल में सुरक्षाकर्मी तैनात होने के बावजूद ऐसा हो रहा है। वहीं अस्पताल सूत्रों के अनुसार लामा मरीजों की बढ़ती संख्या कम दिखाने के लिए कुछ मामलों में उन्हें डीओपीआर दर्ज करने का दबाव बनाया जा रहा है। इससे वास्तविक आंकड़ों पर भी सवाल उठ रहे हैं।
हैलट इमरजेंसी से ही चले जाते काफी मरीज
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हैलट अस्पताल में जून में 6,341 मरीज भर्ती हुए। इनमें करीब 300 को इमरजेंसी से उसी दिन या अगले दिन अनुरोध पर डिस्चार्ज किया गया। मेडिसिन, बाल रोग, सर्जरी और हड्डी रोग विभागों में भी करीब 10 प्रतिशत मरीज डीओपीआर हो रहे हैं।
कई मरीजों ने इलाज के दौरान दम तोड़ा
उर्सला से 200 मरीज बिना बताए गए उर्सला अस्पताल में जून में 2,320 मरीज भर्ती हुए। इनमें 1,360 मरीजों को इलाज के बाद डिस्चार्ज किया गया। करीब 400 भर्ती हैं। 200 से अधिक मरीज बिना सूचना अस्पताल छोड़कर चले गए। वहीं करीब 345 मरीजों को रेफर किया गया। शेष मरीजों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
कांशीराम अस्पताल में भी बढ़े मामले
कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय में जून में 607 मरीज भर्ती हुए। इनमें 331 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया। वहीं 134 मरीज डीओपीआर और आठ मरीज लामा हुए।
जो भी रोगी लामा हो रहे हैं, उनके लिए हम कोशिश कर रहे हैं कि वे न जाएं। इसके लिए हमारा स्टाफ भी निगरानी करता है। आगे हम और ज्यादा निगरानी करेंगे जिससे रोगियों को यहीं पर बेहतर इलाज मिल सके। -डॉ. सीमा श्रीवास्तव, निदेशक, उर्सला
हमारे अस्पताल में हड्डी रोग विभाग में अधिकतर रोगी लामा हो रहे हैं। हम कोशिश कर रहे हैं कि रोगी को बेहतर गुणवत्तापूर्ण इलाज मिले और वह अस्पताल छोड़कर न जाए। डीओपीआर में मरीज ठीक होने के बाद घर जाने की इच्छा जताते हैं जिस पर डॉक्टर उनकी रिक्वेस्ट मान लेते हैं। -डॉ. पीयूष मिश्रा, सीएमएस, कांशीराम अस्पताल
मुरारीलाल चेस्ट अस्पताल और हैलट में यदि रोगी बड़ी संख्या में रोगी लामा और डीओपीआर हो रहे हैं तो इसकी हिस्ट्री निकलवाकर जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट तैयार कराई जाएगी कि कितने मरीज भर्ती हो रहे हैं और कितने बिना बताए जा रहे हैं। -डॉ. सौरभ अग्रवाल, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक