फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कानपुर: मकनपुर शरीफ में 610वें उर्स का आगाज, प्रेम-सौहार्द का संदेश दे रहे मलंग, देश-विदेश से पहुंचे अकीदतमंद

Thu, 29 Oct 2026 10:58 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: बिल्हौर स्थित सूफी संत हजरत बदीउद्दीन जिंदा शाह मदार की दरगाह मकनपुर शरीफ में 610वें सालाना उर्स में देश-विदेश से भारी संख्या में जायरीन दरगाह पर हाजिरी लगाने पहुंच रहे हैं। दरगाह में वर्षों से खिदमत कर रहे मलंग बाबा मासूम अली ने बताया कि यह आस्था का ऐसा दरबार है जहां धर्म, जाति और वर्ग के भेदभाव से परे हर शख्स की मुराद पूरी होती है और लोगों को अमन-चैन का संदेश मिलता है।
विज्ञापन
सूफी संत हजरत बदीउद्दीन जिंदा शाह मदार की दरगाह - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कानपुर के बिल्हौर में मकनपुर के विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत बदीउद्दीन जिंदा शाह मदार की दरगाह मकनपुर शरीफ में 610वें सालाना उर्स के अवसर पर देश-विदेश से अकीदतमंदों का तांता लगा हुआ है। इस पवित्र मौके पर दरगाह में वर्षों से खिदमत कर रहे मलंग बाबा मासूम अली से बातचीत के दौरान बाबा मासूम अली ने उर्स के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि दरगाह पर आने वाले हर शख्स की मुराद पूरी होती है।

विज्ञापन

उन्होंने कहा कि यह अकीदत (आस्था) का दरबार है। यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई का कोई भेद नहीं है। जो भी सच्चे दिल से आता है, वह अपनी झोली भरकर ले जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यहां आने से पूरे साल के लिए लोगों की परेशानियां और मुसीबतें दूर हो जाती हैं और अमन-चैन कायम रहता है।

Trending Videos
विज्ञापन





सूफी परंपरा में मलंगों की रही है अहम भूमिका

सूफी परंपरा के मूल मंत्र को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि हमारे यहां जात-पात पूछे न कोई, हरि को भजे सो हरि का होई का भाव सर्वोपरि है। सूफी परंपरा में मलंगों की अहम भूमिका रही है, जो मदार साहब के पैगाम और शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य लगातार कर रहे हैं। उर्स के मौके पर देश के कोने-कोने के साथ विदेशों से भी जायरीन बड़ी संख्या में दरगाह पर हाजिरी लगाने पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें