बंटवारा एक से लेकर आठ फीसदी की हिस्सेदारी का होता है
नगर निगम की बिल्डिंग में बैठने वाले लेखाकार से लेकर इंजीनियर और बड़ी-बड़ी कुर्सियों पर बैठने वाले अधिकारियों से पार्षदों के बीच ही 40 फीसदी धन का बंटवारा हो जाता है। यह बंटवारा एक से लेकर आठ फीसदी की हिस्सेदारी का होता है। 40 फीसदी धनराशि बाबुओं और अफसरों को देने के बाद 20 फीसदी कमीशन खुद ठेकेदार लेते हैं।
जल्द ही एसआईटी को सौंपी जा सकती है सूची
शेष 40 फीसदी ही पैसा आम जनता की सुविधाओं पर खर्च हो पाता है। पुलिस सूत्रों की मानें, तो कमीशन के इस बंटवारे की एक सूची पुलिस के हाथ भी लगी है जिसमें बाबुओं से अधिकारियों के नाम उनके कमीशन प्रतिशत के साथ लिखे हैं। यह सूची जल्द ही एसआईटी को सौंपी जा सकती है। यदि सूची में दर्ज नाम और कमीशन सही निकला, तो कुछ बाबू और अधिकारी भी पुलिस कार्रवाई के जद में आ सकते हैं।