कानपुर में करीब 3200 करोड़ के अवैध लेनदेन के मामले में जेल गए महफूज अली उर्फ पप्पू छुरी के नेटवर्क में कई शहरों के 38 से 40 बड़े कारोबारी शामिल रहे। यह कानपुर, लखनऊ, उन्नाव, कोलकाता, अहमदाबाद, जालंधर, नागपुर, मंडी के टेनरी, डाईंग यूनिट, स्लॉटर हाउस संचालक, उद्यमी और नामी फर्म मालिक हैं। उनकी वैध और अवैध रकम नकद में वापस कराई जा रही थी। यह जानकारी पुलिस की जांच में सामने आई है। कारोबारियों को नोटिस भेजने की तैयारी है।
चकेरी पुलिस ने गुरुवार को महफूज अली को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जहां से उसे जेल भेजा गया है। वह दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल में छिपता फिर रहा था। डीसीपी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि महफूज अली व उसके साथियों की जांच से लगभग 150 बैंक खातों की जानकारी हुई है। यह म्यूल खाते हैं या आरोपियों के किसी रिश्तेदारों के नाम पर खुले हैं, इसकी जांच कराई जा रही है। इन खातों में कानपुर, लखनऊ, उन्नाव, कोलकाता, अहमदाबाद, जालंधर, नागपुर के बड़े कारोबारियों की रकम ट्रांसफर हुई है।
नोटिस देकर जुटाई जाएगी जानकारी
कई लेनदेन एक दिन में चार से छह करोड़ तक हुए हैं। जिन खातों में रकम भेजी गई है, वह किसी न किसी दूसरी फर्म के नाम से हैं। उनकी डिटेल निकाली जा रही है। कारोबारियों का काफी माल दूसरे देशों को निर्यात होता है। उनका टर्नओवर भी काफी ज्यादा है। ऐसे में आशंका यह भी है कि कहीं कोई बीच का आदमी कंपनी के कुछ लोगों से गठजोड़ कर काले धन को सफेद कर रहा है। उनको नोटिस देकर जानकारी जुटाई जाएगी। इसके आधार पर जांच आगे बढ़ेगी।
फिरोज खान का नेटवर्क तलाश रही पुलिस
महफूज अली की गिरफ्तारी से फिरोज खान, नूर आलम, संजीव दीक्षित, शीबू, रिजवान समेत 15 से 20 लोगों के नाम सामने आए हैं। यह स्लॉटर हाउस व टेनरी संचालकों और उद्यमियाें से संपर्क करते थे। स्लॉटर हाउस संचालकों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ कमाने और आयकर में छूट दिलाने का कार्य महफूज अली कर रहा था। टेनरी व अन्य उद्योगों की जिम्मेदारी फिरोज खान संभाले हुए था। पुलिस फिरोज खान की जड़ें खंगाल रही है।
कई बिचौलिये भूमिगत हो कर रहे कार्य
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक फर्जी खातों में अवैध रकम ट्रांसफर कराने और उसको कैश के रूप में सुरक्षित तरीके से फर्म मालिक या उद्यमियों तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा था। पुलिस को कई दलाल, बिचौलिये और कई सदस्यों के गिरोह में जुड़े होने की जानकारी हुई है। भारी भरकम कैश को निर्धारित जगह तक पहुंचाने का काम केवल भरोसे के लोगों को दिया जाता था। उन्हें समझाया जाता था कि अगर कोई घटना हो जाए तो उसकी सूचना पुलिस को न दी जाए। 16 फरवरी को मो. वासिद और अरशद के साथ मारपीट हुई थी। आरोपी दोनों के बारे में जानते थे। वासिद व अरशद को उनके बारे में पता था इसलिए पुलिस को सूचना देने के बाद घटना से इन्कार कर दिया था।