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तीन युवाओं की शिकायत से हुआ मामले का खुलासा
एडीसीपी साउथ ने बताया कि दो दिन पहले बिहार के बेहद गरीब युवक उनके पास आए। बताया कि वे तीन महीने से कंपनी के लिए काम कर रहे हैं। वेतन और कमीशन के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं मिली है। हालत यह है कि अब तो उनके पास पेट भर खाने और घर लौटने के भी पैसे नहीं बचे।
अर्रा स्थित गेस्ट हाउस में नौकरी की ट्रेनिंग लेते युवा
- फोटो : amar ujala
सेंटर पर चार-पांच कारें भी रखते थे
उन्होंने एडीसीपी को पूरा चेन सिस्टम बताया। तब पुलिस ने गेस्ट हाउस में दबिश दी। एडीसीपी ने बताया कि पकड़े गए ठगों की कार्यशैली पर बनी कुछ दिन पूर्व एक वेब सीरीज पिरामिड स्कैम भी रिलीज हुई थी। हनुमंत विहार थानाध्यक्ष राजीव सिंह ने बताया कि चेन में जुड़ने वाले नए लड़कों को लग्जरी जिंदगी के सपने दिखाए जाते थे। इसके गिरोह के लोग प्रत्येक सेंटर पर चार-पांच कारें भी रखते थे।
दिखाते थे प्रमोशन और लग्जरी जिंदगी के सपने
नए लड़कों को बताते थे आज ये कारें उन्हीं लोगों की है, जो कभी तुम लोगों की तरह बेहद गरीब थे। गिरोह के ठगों ने कंपनी में प्रमोशन के लिए 16 पद बना रखे थे। इनके लिए वेतन और कमीशन मिलाकर शुरुआत 25 हजार से लेकर पांच लाख तक बताई जाती थी। जिसे पाने के लिए चेन पर चेन बनाने के लिए उकसाया जाता था। प्रमोशन के पदों को सिल्वर, गोल्ड, प्लेटिनम आदि 16 नाम दे रखे गए हैं।
जानकारी देते पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल
- फोटो : amar ujala
ये है पूरा मामला
फर्जी मल्टी-लेवल मार्केटिंग (चेन सिस्टम) और पिरामिड चेन नेटवर्क बनाकर बेरोजगार युवकों से नौकरी के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह के छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। दक्षिण क्षेत्र की साइबर टीम, क्राइम ब्रांच और हनुमंत विहार थाना पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की है। पकड़े गए लोगों ने सिर्फ कानपुर में ही 2000 युवाओं से ठगी की है।
80 से 100 करोड़ की ठगी
इनके पूरे में नेटवर्क में 60 हजार से अधिक युवा ठगी के शिकार हुए हैं। इन्होंने 80 से 100 करोड़ की ठगी की है। इनकी ठगी का सबसे अधिक शिकार झारखंड, बिहार और मध्य प्रदेश के युवा हुए हैं। मामले का खुलासा करते पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि पूरे गिरोह की जांच करने के लिए एसआईटी गठित की गई है, जिसका प्रभारी एडीसीपी दक्षिण सुमित सुधाकर रामटेके को बनाया गया है।
गेस्ट हाउस में नौकरी की ट्रेनिंग लेते युवा
- फोटो : amar ujala
चैट के अलावा ऑडियो-वीडियो भी मिले
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि गिरोह के पकड़े गए सदस्यों के नाम रवींद्र यादव बेगुसराय बिहार, कमलेश कुमार पटना बिहार, रोहित शाव कोलकोत्ता पस्चिम बंगाल, मंगल शाक्य दतिया मध्य प्रदेश, राजू कुमार भरहे चौरा थाना बटना देवरिया और मंतोष पासवान शाहपुर जिला भोजपुर बिहार हैं। इनके पास से छह मोबाइल फोन, काॅरपोरेट कागजात और इनके कारनामों को उजागर करते चैट के अलावा ऑडियो-वीडियो भी मिले हैं।
ऐसे बनाते थे ठगी का शिकार
गिरोह के गुर्गे विन मेकर आयुर्वेदाप्राइवेट लि. और धनवंतरी आयुर्वेदा नाम की मल्टी लेवल मार्केटिंग की फ्रेंचाइजी लेकर युवाओं को प्रति माह 25 से 30 हजार की नौकरी का प्रलोभन देते थे। इसके लिए सबसे पहले कॉरपोरेट स्टाइल में दफ्तर बनाकर युवाओं को बुलाते थे। इंटरव्यूह के बाद उनसे फीस और रजिस्ट्रेशन के नाम पर 15 से 30 हजार की वसूली करते थे।
गेस्ट हाउस में जानकारी करती पुलिस
- फोटो : amar ujala
कम से कम दो लोगों को जोड़ने का बनाया जाता था दबाव
इसके बदले में युवाओं को एक से दो हजार की कीमत वाली किट जिसमें साबुन, तेल कपड़े और कुछ दवाएं रहती थी, थमाई जाती थी। इन युवाओं से कहा जाता था कि वे मुख्य रूप से अपनी तरह और लोगों को नेटवर्क से जोड़े, जिससे उनका कमीशन बढ़ता जाएगा। प्रत्येक युवक पर कम से कम दो लोगों को जोड़ने का दबाव बनाया जाता था। ऐसा न करने पर सैलरी न देन और रिफंड वापस न करने की धमकी दी जाती थी।
यूपी में भी चल रहे पांच सेंटर
एडीसीपी सुमित सुधाकर रामटेके ने बताया कि विभिन्न राज्यों में गिरोह के सौ से अधिक ट्रेनिंग सेंटर संचालित हैं। इनमें पांच सेंटर तो यूपी में संचालित हैं। दो प्रमुख सेंटरों में एक नोएडा और दूसरा दिल्ली के लाजपत नगर में संचालित है। ये सभी सेंटर वर्ष 2021 से संचालित हैं। इनके सीएमडी इनामुल हक और विजय कुशवाह हैं। इनका तीसरा साथी मनीष सिन्हा एक बार जेल भी जा चुका है। जल्द ही इनके सरगना समेत पूरे गिरोह को पकड़ने का प्रयास किया जाएगा।