मंत्री ने कार्यक्रम बीच में ही छोड़ दिया
मंत्री को लगभग पैंतालीस मिनट तक कार्यक्रम शुरू होने का इंतजार करना पड़ा। मंच से बार-बार यह घोषणा की जा रही थी कि कार्यक्रम जिलाधिकारी के आने के बाद ही शुरू होगा। इस स्थिति से क्षुब्ध होकर पूर्व भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी रहे मंत्री ने कार्यक्रम बीच में ही छोड़ दिया। उन्होंने तुरंत जिलाधिकारी को अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए एक कड़ा पत्र लिखा।
मंत्री की नाराजगी के मुख्य बिंदु
मंत्री ने अपने पत्र में मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर आपत्ति जताई है। पहला, अधिकारियों की लेटलतीफी। उपजिलाधिकारी वैशाली मंत्री के पहुंचने के पंद्रह मिनट बाद पहुंचीं, जिसके बाद अपर जिलाधिकारी आए। दूसरा, कार्यक्रम शुरू होने में अत्यधिक देरी। मंत्री को पैंतालीस मिनट तक इंतजार करना पड़ा, जबकि मंच से लगातार जिलाधिकारी के आने का इंतजार करने की घोषणा हो रही थी। यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है। मंत्री ने इस अव्यवस्था को गंभीर अनुशासनहीनता माना है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से प्रेरणा लेने की सलाह
मंत्री असीम अरुण ने अपने पत्र में अनुशासन पर जोर दिया है। उन्होंने अधिकारियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली से प्रेरणा लेने की सलाह दी। मंत्री ने कहा कि ये दोनों नेता समय की पाबंदी के लिए जाने जाते हैं और उनकी कार्यशैली अनुकरणीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन की नींव अनुशासन पर टिकी है। मंत्री ने कहा, "अनुशासन ही प्रशासन की नींव है। मुझे कार्यक्रम बीच में छोड़कर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं दिखा।
प्रशासनिक हलकों में हड़कंप और जनचर्चा
मंत्री के इस कड़े रुख ने जिले के प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मचा दिया है। पूर्व भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी असीम अरुण का यह पत्र सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हो रहा है। लोग इस घटना पर व्यापक चर्चा कर रहे हैं। आम जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब एक मंत्री को पैंतालीस मिनट इंतजार करना पड़ सकता है, तो सामान्य नागरिकों को कितनी परेशानी होती होगी। यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को उजागर करती है। इस 'लेटर बम' ने जिले के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
लापरवाही बरतने वालों पर होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी आशुताेष मोहन अग्निहोत्री ने बताया कि कार्यक्रम की मुख्य आयोजक सदर एसडीएम वैशाली थीं। वह निर्धारित समय से 15 मिनट बाद पहुंचीं थीं। इस पर उनसे स्पष्टीकरण तलब किया गया है। कार्यक्रम का समय पहले साढ़े पांच बजे था, जिसे बाद में बढ़ाकर साढ़े छह बजे कर दिया गया था। इसके बारे में मंत्री के प्रतिनिधि विवेक पाठक को भी अवगत कराया गया था। शायद उन्होंने मंत्री को जानकारी नहीं दी, इसलिए वह रोमा स्मारक में एक घंटा पहले पहुंच गए थे। लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।