विधानसभा चुनाव के बाद से ही सक्रिय थे अखिलेश, गम और खुशी में हो रहे थे शामिल
दो दशक से ज्यादा समय तक कन्नौज में अपना वर्चस्व स्थापित कर चुकी सपा को पिछले चुनाव में करारा झटका लगा था। इसे फिर से हासिल करने के लिए अखिलेश यादव ने दो साल पहले हुए विधानसभा चुनाव के बाद से ही फोकस करना शुरू कर दिया था। न वह सिर्फ यहां लगातार दौरा करते रहे, बल्कि गांव-गांव जाकर अपने पुराने समर्थकों व कार्यकर्ताओं की खुशी और गम में शामिल होते रहे। इस बहाने वह यह संदेश देने में कामयाब रहे कि वह यहां से दूर नहीं रहेंगे। भले ही चुनाव के ऐलान के बाद उन्होंने अपनी उम्मीदवारी के एलानी में देरी की, लेकिन इसे भी उनकी एक सोची-समझी रणनीति के तौर पर ही देखा गया। आखिरी समय में नामांकन करके उन्होंने भाजपा को अपने खिलाफ माहौल बनाने का मौका नहीं दिया।
लोधी-पाल विवाद फैक्टर को सपा ने खूब भुनाया
चुनाव के ठीक पहले तिर्वा कस्बे में विरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा लगाने के दौरान प्रशासन की ओर से नियमों का हवाला देर रुकावट डालने और उसके बाद भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया ने लोधी समाज में नाराजगी पैदा कर दी। इससे लोधी समाज के कई नेता भाजपा से छिटककर सपा के पाले में चले गए। अखिलेश यादव ने इस मौके को लपकते हुए रसूलाबाद की हवाई पट्टी और तिर्वा में बने पैरा मेडिकल कॉलेज को रानी अवंतीबाई के नाम पर करने का ऐलान करके भावनात्मक कार्ड खेला। नतीजों यह कारगर होता दिखा। तिर्वा क्षेत्र में हमेशा पिछड़न वाली सपा को इस बार बंपर समर्थन मिला है। इसके अलावा पाल समाज से जुड़े पूर्व मंत्री सतीश पाल और सांसद सुब्रत पाठक के बीच टिकट को लेकर हुई बातचीत का ऑडियो बाहर आने से उसमें की गई बातों से पाल समाज में गलत संदेश गया। भाजपा ने लोधी और पाल समाज की नाराजगी दूर करने के लिए यहां साक्षी महाराज और केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल की सभा कराई। लेकिन नाराजगी दूर नहीं हो सकी। दोनों का ही समर्थन सपा को मिला है।
सपा शासन में कराए गए काम की जनता के बीच रही चर्चा
कन्नौज में सपा शासन के दौरान कराए गए विकास कार्य को सियासी सभाओं में खूब प्रचारित किया गया। कैंसर अस्पताल, कार्डियोलॉजी, पैरा मेडिकल कॉलेज के निर्माण कराने को जनता के बीच रखकर बताया गया कि भाजपा की सरकार ने इसे चालू न करवाकर कन्नौज की उपेक्षा की है। एक्सप्रेसवे और कन्नौज तिर्वा फोरलेन के साथ ही दूसरे बड़े प्रोजेक्टस काे भी जनता के सामने रखा गया। आलू उत्पादकों के लिए एक्सप्रेसवे किनारे बनाई गई विशिष्ट मंडी को आधा-अधूरा शुरू करने और अब तक इत्र पार्क शुरू न करने का मुद्दा भी सपा ने खूब भुनाया। सपा के इस मुद्दे का भाजपा कोई काट नहीं निकाल सकी। सांसद की ओर से यह जरूर कहा गया कि अखिलेश यावद अपने मुख्यमंत्री काल का काम नहीं बल्कि सांसद काल का काम गिनवाएं, लेकिन जनता के बीच यह कारगर नहीं रहा।
पीएम की सभा नहीं हुई, सीएम कन्नौज जिले में नहीं पहुंचे
कन्नौज संसदीय सीट पर प्रधानमंत्री की सभा का न होना भी भाजपा की हार की कई वजहों में से एक माना जा रहा है। वर्ष 2014 में भी यहां तब के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की सभा नहीं हुई थी, भाजपा को हार मिली थी। 2019 में प्रधानमंत्री ने तिर्वा में जनसभा की थी, भाजपा को कांटे के मुकाबले में जीत मिली थी। ऐसे में इस बार कन्नौज की सीमा से बाहर इटावा में सभा होने से यहां भाजपा समर्थकों में गलत संदेश गया। अखिलेश यादव भी इस पर कटाक्ष करने से नहीं चूके। उन्होने कहा कि नतीजों को सामने देखकर बड़े नेता बाहर से ही किनारा कर रहे हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी कन्नौज जिले की तीन विधानसभा में से किसी में सभा नहीं हुई। संसदीय सीट में शामिल औरेया की बिधूना और प्रचार के आखिरी दिन कानपुर देहात की रसूलाबाद सीट पर उनकी सभा जरूर हुई, लेकिन असर नहीं दिखा पाई।