किशोरी से दुष्कर्म के आरोप में बांदा जेल में बंद गैंगस्टर पूर्व ब्लॉक प्रमुख नवाब सिंह यादव और उसके छोटे नीलू यादव को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। पहली ही सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। पूर्व ब्लॉक प्रमुख नवाब सिंह यादव को पिछले साल 12 अगस्त को पुलिस ने किशोरी से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया था, जबकि उसके छोटे भाई नीलू यादव को साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को धमकाने के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
नवाब सिंह इस समय बांदा स्थित मंडलीय कारागार में बंद है, जबकि नीलू कौशांबी जिला जेल में निरुद्ध है। जेल में रहते हुए दोनों ने किशोरी का मेडिकल परीक्षण करने वाली डॉक्टर और उनके पति को जान से मारने की धमकी दी थी। इसके अलावा नवाब सिंह के गुर्गाें ने भी डॉक्टर दंपती को मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाते हुए धमकाया था। पुलिस ने दोनों मुकदमे दर्ज कर गैंगस्टर की कार्रवाई की थी और उसकी सभी चल-अचल संपत्तियों को कुर्क कर दिया था। इस कार्रवाई के खिलाफ नवाब सिंह ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। जहां से उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई थी।
जब हाईकोर्ट से भी कोई राहत नहीं मिली, तो उसने वरिष्ठ अधिवक्ता चांद खां के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई। सदर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया चांद खां ने इससे पहले वरिष्ठ सपा नेता आजम खां के लिए भी सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई 15 सितंबर को हुई, जिसमें सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलीसिटर जनरल केएम नटराजन ने अपनी दलीलें रखीं। सुप्रीम कोर्ट ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता कपिल सिब्बल की सभी दलीलों को खारिज करते हुए जमानत नामंजूर कर दी। उन्होंने बताया कि डॉक्टर दंपती को धमकाने के मामलों में जल्द ही चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की जाएगी।