बिकरू कांड में न्यायिक आयोग की रिपोर्ट जहां विकास के गैंग से जुड़े आरोपियों को कठोर सजा दिलाने में कारगर होगी, वहीं विकास दुबे और अन्य आरोपियों से मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के भाग्य का भी फैसला करेगी।
कानून के जानकारों के मुताबिक विकास दुबे कांड के संबंध में एसआईटी जांच के अलावा, प्रवर्तन निदेशालय, आर्थिक अपराध शाखा, आयकर विभाग समेत कई जांचें चल रही हैं, लेकिन मामले में न्यायिक आयोग की रिपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण साबित होगी।
आयोग को 30 सितंबर तक मामले में जांच रिपोर्ट सौंपनी है। पुलिस ने अब तक की जांच में जो सुबूत जुटाए हैं, वह आयोग को सौंपे जाएंगे। पुलिस जांच में शामिल गवाहों का आयोग अपने स्तर से परीक्षण करेगा।
इसके अलावा पुलिसकर्मियों व घटना से जुड़े लोगों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। आयोग के तीनों सदस्य अपनी अलग-अलग राय या एक संयुक्त राय के साथ अंतिम रिपोर्ट देंगे।
जानकारों के अनुसार अगर न्यायिक आयोग की जांच में पुलिस मुठभेड़ में विकास दुबे की मौत की कहानी झूठी पाई गई और फर्जी मुठभेड़ का खुलासा हुआ तो इसमें शामिल पुलिसकर्मियों को बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। सभी के खिलाफ हत्या का मुकदमा भी चल सकता है।
न्यायिक आयोग की रिपोर्ट का मुकदमों में विशेष महत्व होगा। हालांकि सिर्फ इस रिपोर्ट के आधार पर ही किसी को दोषी मानकर सजा नहीं सुनाई जा सकेगी। कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई के दौरान अन्य तथ्यों पर भी विचार किया जाएगा।