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जोशी ने समझा जाम, पूछा कहां बनें पुल

Tue, 02 Feb 2016 02:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
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सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने शहर का ट्रैफिक दुरस्त करवाने की कवायद शु़रू कर दी है। उन्होंने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर आईआईटी से रामादेवी के बीच जीटी रोड पर लगने वाले जाम की स्थिति पर रिपोर्ट तलब की है।
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भाजपा जिला महासचिव सुनील बजाज की अध्यक्षता में गठित कर यह पूछा है कि आईआईटी से रामादेवी के बीच छह स्थानों पर तीन अंडर पाथ और तीन ओवर ब्रिज कहां कहां बनाए जा सकते हैं। कमेटी में सांसद जोशी के पीए ललित सिंह अधिकारी और ऑफिस अटेंडेंट पप्पी पांडेय भी शामिल हैं।

कमेटी सदस्यों ने बताया कि शहर में छह उन स्थानों को ब्रिज बनाने के लिए चुनना है जहां जमा तो लगता हो लेकिन ब्रिज बनाने की जगह भी हो। जरीब चौकी, कोकाकोला और गुरुदेव चौराहा पर जाम की विकराल समस्या है। इन तीन स्थानों को प्राथमिकता पर चुना जाएगा। अब रेलवे से बातचीत कर तय होगा कि यहां अंडरब्रिज बनेगा या ओवर ब्रिज। छह स्थानों का चुनाव कर तीन दिन में यह रिपोर्ट सांसद को सौंपनी है।
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सांसद जी, पहली कमेटी  की रिपोर्ट भूल गए क्या
स्माल टेनर्स एसोसिएशन और यूपी लेदर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सदस्यों ने सांसद जोशी को ज्ञापन सौंपकर चमड़ा उद्योग से संबंधित वर्ष 2009 में लोकसभा में पेश रिपोर्ट को लागू करवाने की मांग की। चमड़ा उद्यमियों ने वर्तमान प्राक्कलन कमेटी पर सवाल उठाते हुए कहा सात साल पूर्व पेश रिपोर्ट को लागू करवाने में इतना वक्त क्यों लग रहा है, जबकि खुद उन्होंने (सांसद जोशी ने) ही यह रिपोर्ट तैयार कराई थी।

स्माल टेनर्स एसोसिएशन के महासचिव नैयर जमाल और यूपी लेदर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष असरफ रिजवान ने बताया कि डॉ. जोशी की अगुवाई में पांच अगस्त 2008 को लेदर इंडस्ट्री के विकास के लिए 31 सदस्यीय स्टैंडिंग कमेटी ऑफ कामर्स शहर आई थी। कमेटी ने शहर की टेनरियों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की थी, जिसे जून 2009 में संसद में पेश किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि टेनरियां प्रदूषण रोकने का काम करती हैं।

मृत जीवों की खाल बेचकर विदेशी मुद्रा लाने के लिए तारीफ भी की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकार व्यक्तिगत ट्रीटमेंट प्लांट पर ज्यादा जोर देती है जबकि सीईटीपी पर नहीं। टेनरी का पानी सीईटीपी में जाता है तो फिर टेनरियों का मुआयना करने के बजाय सीईटीपी का निरीक्षण होना चाहिए। इसके अलावा किसी राष्ट्रीय स्तर की कमेटी को ही मुआयना करने का अधिकार देने की बात कही थी, जो आज तक लागू नहीं हो पाई।
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