कानपुर देहात। जनपद में कार्यरत करीब ढाई हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीसीओएस) नई उम्मीद लेकर आया है। अब एजेंसी बदलने पर पुराने कर्मियों को मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकेगा और हर महीने पांच तारीख तक वेतन, ईपीएफ- ईएसआई व डिजिटल निगरानी हो सकेगी।
जनपद में स्वास्थ्य विभाग, मेडिकल कॉलेज, नगर निकाय, ब्लॉक, पंचायत, शिक्षा और बाल विकास समेत कई विभागों में आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। नई व्यवस्था के तहत इन कर्मचारियों का रिकॉर्ड यूपीसीओएस पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा, इससे नियुक्ति, उपस्थिति, भुगतान और शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म से संचालित होगी। लंबे समय से इन कर्मचारियों की प्रमुख शिकायतें एजेंसी के स्तर पर वेतन में देरी, कटौती और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी रही हैं। यूपीसीओएस में डिजिटल रिकॉर्ड और भुगतान व्यवस्था से इन समस्याओं को दूर करने का दावा किया गया है लेकिन व्यवस्था लागू होने के बाद निगरानी सबसे अहम होगी।
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पांच तारीख तक वेतन, लेकिन निगरानी जरूरी
परिवहन निगम में कार्यरत कर्मचारी रवि मिश्रा बताते हैं कि यूपीसीओएस में हर महीने की पांच तारीख तक मानदेय भुगतान का प्रावधान किया गया है। ईपीएफ, ईएसआई, मेडिक्लेम और दुर्घटना बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं को भी व्यवस्था से जोड़ा गया है। इससे कर्मचारियों को समय पर भुगतान और सामाजिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। वहीं मंजेश कुमार कहते हैं कि जिले में व्यवस्था लागू होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एजेंसी वास्तव में समय पर वेतन भुगतान करती है या नहीं। ईपीएफ और ईएसआई की कटौती होने के बाद संबंधित राशि कर्मचारी के खाते में समय से जमा होती है या नहीं इसकी भी निगरानी जरूरी होगी। केवल वेतन पर्ची में कटौती दिखना पर्याप्त नहीं होगा।
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एजेंसी बदलने पर नहीं बदले जाएंगे कर्मचारी
नई व्यवस्था में विभाग की जरूरत के अनुसार मैनपावर उपलब्ध कराने के लिए सेवा प्रदाता एजेंसी का चयन जेम के माध्यम से होगा। एजेंसी बदलने की स्थिति में पहले से काम कर रहे कर्मचारियों की सेवा निरंतरता बनाए रखने का प्रावधान है। किसी कर्मचारी को हटाने से पहले सक्षम अधिकारी की अनुमति जरूरी होगी। नियमों का उल्लंघन करने वाली एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई और ब्लैकलिस्ट करने का भी प्रावधान है। इससे वर्षों से विभागों में काम कर रहे कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। कर्मचारी बताते हैं कि पहले एजेंसी बदलने के साथ ही पुराने कर्मचारियों के सामने नौकरी बचाने की चिंता खड़ी हो जाती थी। अब व्यवस्था में एजेंसी से ज्यादा विभागीय निगरानी की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
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बयान ....................
यूपीसीओएस की व्यवस्था का उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों को पारदर्शी, सुरक्षित और समयबद्ध सेवा व्यवस्था देना है। जिले में सभी विभागों का कर्मचारी डाटा पोर्टल पर अपडेट कराया जा रहा है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्धारित नियमों के अनुसार समय पर भुगतान, सेवा निरंतरता और शिकायतों का प्रभावी निस्तारण हो। - राम अशीष, सहायक श्रमायुक्त
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पहले क्या था, अब क्या बदलेगा
यूपीसीओएस से पहले - अब यूपीसीओएस में
विभाग अलग-अलग एजेंसियां चुनते थे - जेम के माध्यम से एजेंसी चयन
एजेंसी बदलने पर सेवा को लेकर असमंजस - सेवा निरंतरता का स्पष्ट प्रावधान
वेतन में देरी की शिकायतें - पांच तारीख तक भुगतान का नियम
उपस्थिति व भुगतान अलग-अलग रिकॉर्ड - डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन निगरानी
शिकायत निस्तारण की स्पष्ट व्यवस्था नहीं - पोर्टल आधारित शिकायत प्रणाली
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वेतन अटकने पर कौन होगा जिम्मेदार ?
पांच तारीख तक भुगतान नहीं होने पर जिम्मेदारी तय करनी होगी।
ईपीएफ ईएसआई की रकम खाते में जमा होने की निगरानी जरूरी होगी।
गलत उपस्थिति के कारण वेतन कटने पर तत्काल सुधार की व्यवस्था चाहिए।
एजेंसी की शिकायत पर कर्मचारी को विभागीय स्तर पर सुनवाई का अधिकार मिलना जरूरी।