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सफलता की कहानी- स्विटजरलैंड की नौकरी छोड़ बने आईआरएस

Sun, 31 Dec 2017 12:48 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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परिवार के साथ मोहित अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
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कानपुर आईआईटी कानपुर के 2003 बैच के छात्र मोहित अग्रवाल शनिवार को 14 साल बाद वापस अपने पुराने कैंपस पहुंचे। मौका था पूर्व छात्र सम्मेलन का। मोहित मौजूदा समय अहमदाबाद में ज्वाइंट कमिश्नर जीएसटी हैं। उन्होंने अपनी सफलता की कहानी बयां की। 
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मूल रूप से हाथरस के रहने वाले मोहित ने आईआईटी से 2003 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली। इसके बाद वह स्विटजरलैंड चले गए। वहां उन्हें सेंटर फॉर स्विस इलेक्ट्रॉनिक्स एंड माइक्रो टेक्नोलॉजी (सीएसईएम) कंपनी में लाखों के पैकेज पर नौकरी मिल गई। मोहित ने सीएसईएम में महज तीन महीने नौकरी की और फिर छोड़कर अपने देश लौट आए। मोहित बताते हैं कि उन्हें वहां अपने देश जैसी खूबसूरती नहीं दिखी। वह अपनों के लिए और अपने देश के लिए कुछ करना चाहते थे।


इसलिए वापस देश आकर सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू कर दी। सिविल सर्विसेज एग्जाम 2005 को उन्होंने क्रैक किया और 178 रैंक हासिल कर ली। उस दौरान सिविल सर्विसेज में सीटें बहुत कम हुआ करती थीं। उन्हें इंडियन रेवन्यू सर्विसेज (आईआरएस) के जरिए ज्वाइंट कमिशनर कस्टम (अब जीएसटी) बनाया गया।
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सपना था लेकिन भ्रमित था 
मोहित बताते हैं कि बीटेक फोर्थ ईयर में ही वह सिविल सर्विसेज में जाने का मन बना चुके थे लेकिन उस दौरान वह भ्रमित थे। स्विटजरलैंड जाकर उनका भ्रम दूर हुआ। मोहित के पिता मुकेश मोहन अग्रवाल बिजनेसमैन और मां कांता अग्रवाल गृहणी हैं। मोहित बताते हैं कि उनके बैच के कुमार सौरभ और प्रशांत मिश्र भी सिविल सर्विसेज में हैं। 
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