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जेके कैंसर: स्थापना के 62 साल बाद बनेंगे तीन नए विभाग, शासन की मिली मंजूरी…रोगियों को मिलेंगी ये सुविधाएं

Fri, 23 May 2025 12:11 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: इंस्टीट्यूट के निदेशक एवं प्रोफेसर डॉ. एसएन प्रसाद ने बताया कि कैंसर रोगियों के ऑपरेशन संस्थान में होने लगेंगे। अभी दो एनीस्थेटिस्ट हैं, लेकिन पूरा विभाग खुल जाने से यहां और भी प्रक्रिया शुरू हो जाएगीं। जटिल से जटिल सर्जरी में आसानी होगी। 
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जेके कैंसर इंस्टीट्यूट - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में जेके कैंसर इंस्टीट्यूट में स्थापना के 62 साल बाद तीन नए विभाग बनेंगे। शासन ने सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, एनेस्थीसिया और पैथोलॉजी विभाग के लिए पद सृजित कर दिए हैं। रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग को भी अपडेट किया जाएगा। इससे कैंसर रोगियों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। उन्हें जांच, ऑपरेशन और इंटेंसिव केयर की सुविधा मिल सकेगी। यह विभाग इसी वर्ष चालू हो जाएंगे।

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जेके कैंसर इंस्टीट्यूट अब तक रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के सहारे चल रहा है। कैंसर की जांच के लिए पिछले कई वर्षों से बायोप्सी की भी सुविधा नहीं है। रोगियों को बायोप्सी जांच के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग जाना पड़ता रहा है। नए विभाग खुलने से रोगियों को सभी सुविधाएं इंस्टीट्यूट में मिलने लगेंगी। विभाग खुलने से कैंसर के इलाज के विशेषज्ञों की संख्या बढ़ेगी। प्रशिक्षित पैरा मेडिकल स्टाफ भी रहेगा।

1963 के बाद पहली बार खुलेंगे विभाग
इंस्टीट्यूट के निदेशक एवं प्रोफेसर डॉ. एसएन प्रसाद ने बताया कि कैंसर रोगियों के ऑपरेशन संस्थान में होने लगेंगे। अभी दो एनीस्थेटिस्ट हैं, लेकिन पूरा विभाग खुल जाने से यहां और भी प्रक्रिया शुरू हो जाएगीं। जटिल से जटिल सर्जरी में आसानी होगी। नवीनतम तकनीक से पैथोलॉजिकल जांचें की जा सकेंगी। सभी विभाग छह महीने से लेकर साल भर के अंदर काम करना शुरू कर देंगे। यह विभाग वर्ष 1963 में संस्थान की स्थापना के बाद पहली बार खुलेंगे।

विभागों की स्थिति

  • सर्जिकल ऑन्कोलॉजी: एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर, एक असिस्टेंट प्रोफेसर, छह रेजीडेंट, एक सिस्टर, 21 स्टाफ नर्स समेत कुल 36 लोगों का स्टाफ रहेगा। आउटसोर्सिंग में मेडिकल सोशल वर्कर, ओटी टेक्नीशियन समेत 28 लोगों का स्टाफ होगा।
  • एनेस्थीसिया: एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर, एक असिस्टेंट प्रोफेसर, तीन सीनियर और तीन जूनियर रेजीडेंट, एक सिस्टर, 21 स्टाफ नर्स समेत कुल 36 लोगों का स्टाफ रहेगा। आउटसोर्सिंग में मेडिकल सोशल वर्कर, आईसीयू टेक्नीशियन समेत 28 लोगों का स्टाफ होगा।
  • पैथोलॉजी विभाग: एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर, एक असिस्टेंट प्रोफेसर, तीन सीनियर और तीन जूनियर रेजीडेंट, एक सिस्टर, 21 स्टाफ नर्स समेत कुल 36 लोगों का स्टाफ होगा। आउटसोर्सिंग में मेडिकल सोशल वर्कर, लैब टेक्नीशियन, सेनीटरी वर्कर समेत 28 लोगों का स्टाफ रहेगा।
  • रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग: दो प्रोफेसर, दो एडीशनल प्रोफेसर, दो एसोसिएट प्रोफेसर, दो असिस्टेंट प्रोफेसर, छह सीनियर और छह जूनियर रेजीडेंट, दो सिस्टर, 42 स्टाफ नर्स समेत कुल 72 लोगों का स्टाफ रहेगा। आउटसोर्सिंग में मेडिकल सोशल वर्कर, रेडियोथैरेपी टेक्नीशियन समेत 56 लोगों का स्टाफ होगा।
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रोगियों को मिलेंगी ये सुविधाएं
  • कैंसर रोगियों की अत्याधुनिक पैथोलॉजिकल जांचें होंगी।
  • मार्कर जांचें होने से रोगियों के मर्ज का पहले पता लग जाएगा।
  • विभिन्न प्रकार के कैंसर रोगियों को विशेषज्ञ इलाज मिलेगा।
  • स्पेशलिस्ट सर्जन रोगियों का आपरेशन करेंगे।
  • आईसीयू की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
  • कैंसर रोगियों के पेन मैनेजमेंट की व्यवस्था रहेगी।
  • अत्याधुनिक तकनीक से रेडियोथैरेपी की व्यवस्था रहेगी।
  • विभागों बनने से विभिन्न संसाधनों का लाभ मिलेगा।
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