कानपुर देहात। राष्ट्रपति के आगमन और उनके सरल संबोधन को लोगों ने मंत्रमुग्ध होकर सुना और झींझक व रूरा वासी इस अविस्मरणीय पल के साक्षी बने। वहीं अपनों के बीच आए राष्ट्रपति ने भी न भूलने वाली यादें सहेजीं।
देश के प्रथम नागरिक रामनाथ कोविंद की अगवानी के लिए कई दिन से झींझक व रूरा स्टेशनों को सजाया संवारा जा रहा था। लोग उनका इंतजार कर रहे थे और उसी सिद्दत से राष्ट्रपति भी अपनों से मिलने को बेताब थे। शुक्रवार को यह बात महामहिम ने रूरा स्टेशन में संबोधन में कही। राष्ट्रपति डायस पर खड़े होकर लोगों से मुखातिब हुए तो उन्होंने हर छोटी बड़ी बात साक्षा की।
निर्माणाधीन आरओबी का जिक्र किया। काम जल्द पूरा कराने की बात रेलवे बोर्ड के चेयरमैन से कही। सुरक्षा को लेकर सख्ती रही तो हर कोई राष्ट्रपति के कार्यक्रम स्थल तक नहीं जा सका। अलबत्ता आयोजन स्थल के नजदीक के घरों की छतों व बालकनी में खड़े होकर लोगों ने उनका संबोधन सुना। इस दौरान राष्ट्रपति की सरलता और सहज तरीके से बात कहने की कला का हर कोई कायल हो गया। अपनों के बीच आने की खुशी राष्ट्रपति के चेहरे पर भी साफ दिख रही थी।
खुल कर नहीं हुई बात पर मिलने की खुशी रही खास
कानपुर देहात। परिजनों व मित्रों की राष्ट्रपति से खुल कर बात जरूर नहीं हुई पर मिलने की खुशी खास रही। झींझक स्टेशन पर राष्ट्रपति से मिलने वालों की लंबी फेहरिस्त थी। इसमें भाभी, भतीजी, भाई व भतीजे और दोस्त थे। कुल 38 लोगों की सूची थी। सुरक्षा कारणों को लेकर सभी मिलने वालों को मोबाइल ले जाने की छूट नहीं दी गई। वहीं ट्रेन से उतर कर राष्ट्रपति परिजनों व दोस्तों से मिले। यह मिलन बेहद संक्षिप्त रहा। राष्ट्रपति से मिलने की खुशी परिजन व मित्रों के चेहरों पर साफ दिख रही थी।