छिबरामऊ। नगर में सराफा व्यापारियों और आभूषण कारीगर के बीच हुए विवाद ने मंगलवार को तूल पकड़ लिया है। इस मामले में सपा व्यापार सभा के जिलाध्यक्ष प्रीयतेश तोमर ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए घटना को सुनियोजित लेनदेन का विवाद बताया है। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
जिलाध्यक्ष का आरोप है कि कारीगरों के पास से छिबरामऊ के कई व्यापारियों का डेढ़ से दो किलो सोना फंसा हुआ था। इसको लेकर कुछ कारीगर फरार हो चुके हैं। अब जहांगीर भी भागने की फिराक में था। उसके दुकान खाली करने और मकान बेचने की भनक लगते ही व्यापारियों ने अपने माल की मांग की थी। इसके बाद यह विवाद खड़ा हुआ। आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस आपसी लेनदेन के मामले को हिंदू-मुस्लिम रंग देकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि नगर में रहकर काम करने वाले बंगाली कारीगरों के पहचान पत्र व नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों की भी सघन जांच हो। ताकि उनकी असलियत सामने आ सके। जिलाध्यक्ष ने कहा कि सराफा व्यापारियों पर एकतरफा कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पहले भी सोना लेकर भागे थे कारीगर, बंगाल में मिली थी धमकी
जिलाध्यक्षा के अनुसार, पुलिस ने जिन सराफा व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की है, उन पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। इसके बाद भी पुलिस ने अपराधियों जैसा व्यवहार किया, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इससे पहले सराफ विम्मी वर्मा, अंशु वर्मा और अंश गुप्ता जैसे व्यापारियों का सोना लेकर पांच बंगाली कारीगर फरार हो चुके हैं। छिबरामऊ से जब कुछ लोग अपनी बकाया वसूली के सिलसिले में बंगाल गए थे, तो वहां भागे बंगाली कारीगरों ने अपने साथियों के साथ मिलकर धारदार हथियार से जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया था।