कानपुर से रहा है पुराना नाता
कानपुर से ही उन्होंने पत्रकारिता सीखी
‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में शैलेंद्र पांडेय ने बताया कि कानपुर से उनका पुराना नाता रहा है। कानपुर शहर से ही उन्होंने पत्रकारिता सीखी और नाम कमाया। उन्नाव के बीघापुर में एक शिक्षक के घर जन्मे शैलेंद्र अपनी फिल्म की कहानी बताते हुए गुजरे जमाने के पत्रकारिता के दिनों में खो गए। शैलेंद्र इन दिनों दिल्ली में एक लीडिंग मीडिया हाउस में बतौर नेशनल फोटो एडिटर काम कर रहे हैं। कई नेशनल और इंटरनेशनल अवॉर्ड जीत चुके शैलेंद्र ने दो साल पहले जेडी फिल्म की कहानी लिखी थी। इस फिल्म को पहले वह कम बजट में ही बनाना चाहते थे लेकिन फिर कुछ ऐसे मददगार मिल गए जिन्होंने फिल्म को मल्टीप्लेक्स तक पहुंचा दिया। जेडी फिल्म बीते शुक्रवार को वर्ल्ड वाइड रिलीज हो चुकी है। कानपुर और आसपास जिलों के सिनेमाघरों में ये फिल्म जल्द ही लग जाएगी। शैलेंद्र ने बताया कि फिल्म में दिखाया गया है कि जो पत्रकार शोषण, अत्याचार और घोटालों की खबरें छापकर जनता के सामने सच उजागर करते हैं दरअसल उनका क्या हाल है, वे किन परेशानियों से गुजरते हैं, उन पर कैसे-कैसे पॉलिटिकल प्रेशर होते हैं यही सच्चाई जेडी फिल्म में देखने को मिलेगी।
सेंसर बोर्ड अध्यक्ष प्रसून जोशी को लिखना पड़ा ओपन लेटर
1997 में अमर उजाला कानपुर से शुरुआत, फिर कई बड़े मीडिया हाउस के लिए बतौर फोटो जर्नलिस्ट काम किया
डायरेक्टर-प्रोड्यूसर शैलेंद्र पांडेय ने बताया कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म ‘जर्नलिज्म डिफाइन (जेडी)’ को ‘ए’ सर्टिफिकेट दिया है। जबकि फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है जो परिवार के साथ देखने लायक न हो। फिल्म को सर्टिफिकेट तो पहलाज निहलानी के कार्यकाल में ही मिल गया था लेकिन प्रोमो का सेंसर रिलीज के दिन मिला। प्रोमो का सेंसर रिलीज देर से करने के पीछे सेंसर बोर्ड की क्या मंशा रही इस पर शैलेंद ने सेंसर बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) के अध्यक्ष प्रसून जोशी को ओपन लेटर लिखा है। प्रोमो का सेंसर सर्टिफिकेट देरी से मिलने के कारण फिल्म का प्रोमा और ट्रेलर टीवी या सिनेमाघरों में रिलीज़ नहीं किया जा सका। इसके बाद शैलेंद्र ने प्रसून जोशी से मुलाकात भी की लेकिन इससे कोई फायदा नहीं हुआ। ओपन लेटर में शैलेेंद्र ने इस बात का भी जिक्र किया है कि कितनी मेहनत और कमाई के पैसे लगाकर उन्होंने यह फिल्म बनाई है।
जेडी फिल्म की कहानी
फिल्म की पटकथा कुमार विजय और शैलेंद्र पाण्डेय ने ही लिखी
जेडी फिल्म लखनऊ के एक ईमानदार पत्रकार जय द्विवेदी की कहानी है जो एक विवाद में फंस जाता है। जय के पिता लखनऊ के जाने-माने डेंटिस्ट होते हैं। जय ने पत्रकारिता की पढ़ाई अमेरिका से की है। डॉक्टर पिता को पसंद नहीं होता कि उसका बेटा जर्नलिज्म पेशा अपनाये। फिल्म की कहानी कहीं न कहीं तहलका पत्रिका के संपादक तरुण तेजपाल के जीवन से प्रेरित होती नजर आती है। फिल्म के निर्माता और निर्देशक शैलेंद्र पांडेय तहलका पत्रिका में फोटो एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं। हालांकि अमर उजाला को दिए इंटरव्यू में शैलेंद्र पाण्डेय ने फिल्म के तरुण तेजपाल के जीवन से प्रेरित होने से इनकार किया है। फिल्म में वास्तविक जीवन के कई चर्चित नाम भी नजर आएंगे। गोविदं नामदेव, अमन वर्मा, वेदिता प्रताप सिंह, अरविंद गौड़ मुख्य भूमिका में हैं। अमिताभ बच्चन और मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाने वाले राजनेता अमर सिंह फिल्म में ईमानदार नेता की भूमिका में दिखेंगे। वहीं मुंबई बम धमाकों में टाडा कोर्ट के जज रहे पीडी कोडे न्यायाधीश का रोल निभाकर अपना फिल्म डेब्यू कर रहे हैं। फिल्म में न्यूज चैनल की पूर्व एंकर तनु शर्मा भी अहम भूमिका में होंगी। फिल्म की पटकथा कुमार विजय और शैलेंद्र पाण्डेय ने लिखी है। संगीत जान निसार लोन, गणेश पाण्डेय और मॉन्टी शर्मा का है। फिल्म के डीओपी कपिल गौतम, राजेश मिश्रा और मनीथ पंडित हैं। जबकि एडिटिंग आर घाड़ी ने की है। लोकप्रिय टीवी सीरियल हिटलर दीदी से चर्चा में आई जसवीर कौर ने फिल्म में आइटम डॉन्स किया जो कनपुरिया नौटंकी पर बेस्ड है। फिल्म में छह गाने हैं। गीत कुमार विजय और साहिल फतेहपुरी ने लिखे हैं। फिल्म के दो गानों की कोरियोग्राफी संदीप सोपारकर ने की है। फिल्म में एक नौटंकी सॉन्ग्स है जो बेसिकली कनपुरिया नौटंकी से ही लिया गया है।
प्रोफाइल-
अमर सिंह के साथ फिल्म की शूटिंग के दौरान शैलेंद्र पांडेय
नाम- शैलैंद्र पांडेय
जन्मतिथि- 07-07-1977 (बीघापुर गांव, उन्नाव )
पिता- स्वर्गीय राधेश्याम पांडेय (शिक्षक)
मां- देववती देवी
पेशा- नेशनल फोटो एडिटर, फिल्ममेकर, राइटर
उपलब्धि- रामनाथ गोयनका अवॉर्ड 2004
करियर- 1997 में अमर उजाला कानपुर से शुरुआत, फिर कई बड़े मीडिया हाउस के लिए बतौर फोटो जर्नलिस्ट काम किया
लाइफ की पहली फोटो अमर उजाला में छपी
जेडी फिल्म के कलाकारों के साथ डायरेक्टर-प्रोड्यूसर शैलेंद्र पांडेय
जेडी फिल्म के निर्माता-निर्देशक शैलैंद्र पांडेय ‘अमर उजाला’ परिवार के सदस्य भी रहे हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1997 में कानपुर अमर उजाला से ही की थी। उनके द्वारा खींचा गया पहला बाईलाइन फोटो अमर उजाला में ही छपा था जिसमें उन्होंने स्कूलों की बदहाली को अपने बेहतरीन कैमरा एंगल से दर्शाया था। शैलेंद्र इन दिनों नोएडा मे अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। उन्होंने अपनी पहले बॉलीवुड फिल्म जेडी की शूटिंग नोएडा-मुंबई के अलावा गोआ, कानपुर, लखनऊ और उन्नाव में भी की है। ‘जेडी’ में उन्होंने अपने पैतृक गांव बीघापुर का मशहूर संदोही माता का मंदिर भी दिखाया है। पत्रकारिता में करियर शुरू करने से पहले उन्हें डिंफेंस सर्विस में जाने की बहुत तमन्ना थी इसी की तैयारी करने वह दिल्ली गए थे। लेकिन किस्मत में कुछ और ही लिखा था। साल 2004 दिसंबर में नीदरलैंड में हुए आरएनजी प्रेस फोटो एग्जिबिशन में शैलेंद्र की तस्वीरें खूब सराही गईं जिसके लिए उन्हें रामनाथ गोयनका अवॉर्ड दिया गया। इस आरएनजी अवॉर्ड में वर्ल्ड प्रेस की विजिट शामिल थी। इंडिया को रिप्रेजेन्ट करते हुए शैलेंद्र लेमोन्ड इंटरनेशनल फ्रेन्च मैगजीन में टॉप-12 वर्ल्ड फोटोग्राफर्स में सेलेक्ट हुए थे।
छोटे फिल्ममेकर्स के साथ भेदभाव करता है जिला प्रशासन
फिल्म की शूटिंग के दौरान एक्टर अमन वर्मा के साथ डायरेक्टर-प्रोड्यूसर शैलेंद्र पांडेय
शैलेंद्र ने बताया कि फिल्म की शूटिंग के पहले कानपुर और उन्नाव जिला प्रशासन को ये सूचना दे दी गई थी कि किन-किन तारीखों में कहां-कहां शूटिंग होनी है। लेकिन जिला प्रशासन ने कोई सहयोगी नहीं किया। जब शूटिंग कम्पीलट हो गई और फिल्म के सीन एडमिनिस्ट्रेशन को सबमिट किए गए उन्होंने लोकेशन्स को वेरीफाई भी नहीं किया। यही कोई बड़ा फिल्ममेकर अगर छोटे जिलों और शहरों में फिल्म की शूटिंग करता है तो पुलिस-प्रशासन उन्हें हर तरह का सहयोग करने के लिए हमेशा तैयार रहता है। छोटे फिल्ममेकर्स के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।