'आसमानों से कह दो की हमारी उड़ान देखनी है तो अपना कद और ऊँचा कर ले… हुस्न वालो से कह दो की अगर इश्क देखना हो तो हमसे आके मिले' कुछ ऐसा ही कर दिखाया है कानपुर के कलश दीक्षित ने। वाे इस वक्त जापान के क्यूशू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में स्पेस लांच व्हीकल्स की कोर टीम का हिस्सा हैं।
अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि दिसंबर में लांच होने वाले रॉकेट के बनने से लेकर उसकी लांचिंग तक आने वाले कुल खर्च का आकलन (कॉस्ट एस्टीमेशन टीम) करेंगे। यह रॉकेट दरअसल पहले से ही लांच सैटेलाइट से कनेक्टिविटी की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए लांच किया जा रहा है।
विज्ञापन
2 of 4
चेन्नई की एसआरएम यूनिवर्सिटी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र
2016 में उन्होंने चेन्नई की एसआरएम यूनिवर्सिटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में प्रवेश लिया। अपने बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें जापान के क्यूशू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में रिसर्च करने का मौका मिला।
हमेशा टॉप 10 में रहने वाले कलश को जापान में इस रिसर्च के लिए एसआरएम यूनिवर्सिटी ने 5.5 लाख रुपये व क्यूशू इंसटीट्यूट ने 1.6 लाख रुपये प्रति माह बतौर स्कॉलरशिप दिए हैं। कलश का सपना अपने देश भारत का नाम दुनिया में रोशन करना है।
विज्ञापन
3 of 4
जापान के क्यूशू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कर रहे हैं रिसर्च
जापान के क्यूशू इंस्टीट्यूट से उन्हें मास्टर्स डिग्री करने का भी प्रस्ताव मिला है। उनके पिता मनोज दीक्षित कानपुर में ही व्यापार करते हैं। मां प्रीति दीक्षित गृहिणी हैं। काम के प्रति बेटे के समर्पण और उपलब्धि से सभी उत्साहित हैं।
रॉकेट को बनवाने से लेकर उसको लांच करने तक में कितना खर्च आएगा कलश इसका बजट बनाएंगे। उनके आकलन पर ही प्रोजेक्ट एक-एक कदम बढ़ रहा है। तकनीकी पक्ष के साथ ही इस आर्थिक पहलू का पूरे प्रोजेक्ट में विशेष योगदान है।
जापान में रॉकेट लांचिंग की कोर टीम में कानपुर शहर का कलश
वाहनों से निकलने वाली जहरीली गैस के पर्यावरण पर दुष्प्रभाव को कम से कम करने पर भी कलश काम कर रहे हैं। कैटेलिटिक कन्वर्टर नाम के निजी प्रोजेक्ट पर उनका नेतृत्व क्यूशु इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर योनेमोटो कर रहे हैं। कलश के अनुसार उनका चयन जापान के इंटरनेशनल फ्रेंडशिप फेस्टिवल में वाद्ययंत्रों पर प्रस्तुति देने के लिए भी हुआ है।