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पुलवामा आतंकी हमला: वीर सपूतों की बहादुर बेटियां, वेदना ऐसी कि आत्मा भी रो दे...

Sun, 17 Feb 2019 05:43 PM IST
प्रशांत कुमार यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए कन्नौज के प्रदीप यादव की बेटी सुप्रिया व उन्नाव के सीआरपीएफ जवान अजीत की बेटी ईशा ने जब तिरंगे से लिपटे पिता का पार्थिव शरीर देखा तो उनकी आंखों में कैद आंसुओं का समंदर फूट पड़ा। इस घड़ी में भी इन बेटियों ने जो मिसाल पेश की उसे देख हर कोई यही कह रहा था कि ऐसा तो सिर्फ एक सिपाही की बेटी ही कर सकती है। इन बेटियों के हर एक शब्द से शौर्य झलक रहा था।
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इसके बाद शहीद प्रदीप यादव की बेटी ने जो कहा वो शायद एक सैनिक की बेटी ही कह सकती है। शहीद पिता को मुखाग्नि देने के बाद शहीद प्रदीप यादव की 11 साल की बेटी सुप्रिया बेहोश हो गई। जब उसे होश आया और उसने जो कहा उसे सुनकर वहां खड़े अफसर अचंभित रह गए। बेटी के हर एक शब्द से शौर्य झलक रहा था।
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पिता की शहादत से गमगीन बड़ी बेटी सुप्रिया ने सेना में जाने की इच्छा जताई है। जिलाधिकारी रवींद्र कुमार और एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने सुप्रिया से बात की तो उसने दो टूक कहा कि उसकी इच्छा है कि वह पिता की तरह सेना में भर्ती होकर देश सेवा करे।

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दस साल की सुप्रिया की यह बात सुनकर अफसर अचंभित रह गए। दोनों अफसरों ने सुप्रिया के जज्बे को सराहा। सुप्रिया कानपुर के एक प्रईवेट स्कूल में कक्षा 5 की छात्रा है। दो दिन बाद उसकी परीक्षाएं शुरु होने वाली हैं।
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प्रदीप सिंह यादव श्रीनगर में 115 बटालियन में सिपाही थे। चार दिन पहले छुट्टी गुजार कर लौटे थे। एक मकान कानपुर के बारा सिरोही में है। वहां पत्नी नीरज देवी और दो बेटियां 10 वर्षीय सुप्रिया यादव और ढाई साल की सोना यादव हैं। प्यार से सब सोना को छोटी बुलाते हैं।
 
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वहीं हमले में शहीद उन्नाव के सीआरपीएफ जवान अजीत की 8 वर्षीय बेटी ईशा पिता की अंतिम यात्रा घर से लेकर अंत्येष्टि स्थल तक शामिल रही। जांबाज पिता की शहादत का दर्द मासूम के चेहरे पर झलक रहा था।
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वह कभी ताबूत तो कभी भीड़ को निहार रही थी। जिसकी भी नजर मासूम के चेहरे पर पड़ती वह आतंकियों की कायराना हरकत को कोसते हुए भावुक रहा।

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ईशा बीच-बीच में भीड़ की तरफ देखकर पिता को सैल्यूट दे रही थी। बेटी के जज्बे को हर किसी ने हाथ जोड़कर सम्मान दिया। अंत्येष्टि स्थल पर ईशा ताबूत को निहारते हुए फफक पड़ी। बाबा प्यारेलाल भी उसे सीने से लगाकर रो पड़े।
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परिजनों से शनिवार देर शाम कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने फोन पर बात की। शहीद अजीत की बेटी ईशा से फोन पर बात कर पूछा कि वह क्या बनना चाहती हैं। डॉक्टर बनने की ख्वाहिश जान प्रियंका बोलीं तुम मन लगाकर खूब पढ़ो, हम तुम्हारे सपने पूरे करेंगे। 
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