इस्लाम में कमाने की जिम्मेदारी मर्द पर
तीन तलाक पर छिड़ी बहस का असर कानपुर शहर के परेड स्थित रजबी ग्राउंड में चल रहे अंजुमन फरोग-ए-सुन्नत के जलसा ‘सीरत-ए-सहाबा’ में महिलाओं के सत्र में भी देखने को मिला। जलसे में सूरत (गुजरात) से आए मौलाना सलाहुद्दीन सैफी ने महिलाओं से कहा कि किसी के बहकावे में न आएं। शरीअत के मुताबिक जिंदगी गुजारेंगी तो कभी तलाक की नौबत नहीं आएगी।
जलसे में बड़ी तादाद में महिलाएं मौजूद रहीं। मौलाना ने कहा कि इस्लाम में कमाने की जिम्मेदारी मर्द पर है। घर में मर्द के होने पर औरतों का नौकरी कराना गलत है। आजादी के नाम पर औरतों से नौकरी कराना उनसे दोहरी गुलामी कराने के बराबर है। वह दिन भर नौकरी करने के बाद घर में खाना बनाती हैं। बच्चों, पति और परिवार की देखभाल भी करती है। उन्होंने कहा बच्चों की परवरिश मां ही बेहतर कर सकती है। ऐसे में उसका नौकरी करना गलत है। उन्होंने कहा कि शादी के पहले लड़कियां अपनी मां से घरेलू गृहस्थी चलाने के तरीके सीखें।
सुंदरता चाहे जितनी हो लेकिन घर चलाने का तरीका नहीं मालूम तो परिवार नहीं चलेगा। जलसे का संचालन कारी आसिफ ने किया। मुफ्ती इकबाल कासमी, हाजी शोएब बेग मौजूद रहे। रात के जलसे को मौलाना मुफ्ती हुजैफा ने खिताब किया। रजबी ग्राउंड पर चल रहे अंजुमन फरोग-ए-सुन्नत के जलसे में बोले सूरत से आए मौलाना - मौलाना सलाहुद्दीन सैफी ने कहा कि