फर्जी फर्मों की खोजबीन और टैक्स चोर व्यापारियों पर शिकंजा कसने के मकसद से वाणिज्य कर विभाग ने पूरे प्रदेश के सभी जोन में आईटीसी क्लेम के सत्यापन का अभियान चलाया है।
कानपुर जोन में भी सभी तीस खंडों में यह कवायद आरंभ की गई है। यहां लगभग 20 हजार से ज्यादा फर्में इस अभियान के तहत जांची-परखी जा रही हैं। गौरतलब है कि वाणिज्य कर के ज्वाइंट कमिश्नर एके सिंह पर हमले के दौरान भी आईटीसी क्लेम के नाम पर घपले के मामले भी चर्चा में आए थे।
वाणिज्य कर मुख्यालय में बड़े पैमाने पर आईटीसी क्लेम में फर्जीवाड़े की शिकायतें आ रही हैं। इसमें यह पता चला है कि बिना खरीद बिक्री किए केवल बिल या फिर टैक्स इनवॉइस के जरिए आईटीसी ली जा रही है।
इसमें कुछ फर्जी फर्मों की संलिप्तता की भी खबर है।
इसे देखते हुए कमिश्नर मृत्युंजय कुमार नारायण ने प्रदेश भर के सभी जोन में आईटीसी सत्यापन का अभियान चलाया गया है।
इसी क्रम में कानपुर जोन के तीन जिले कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव के तीस खंडों में पंजीकृत सभी फर्मों के आईटीसी का सत्यापन किया जा रहा है।
इस अभियान के तहत होने वाली कार्रवाई की रिपोर्ट प्रत्येक माह मुख्यालय भेजी जाएगी। विभागीय सूत्रों के मुताबिक पहले पचास लाख से अधिक टर्नओवर करने वाले व्यापारियों को इस अभियान में पहले जांचा जा रहा है, उसके बाद छोटे व्यापारियों के विरुद्ध पड़ताल आरंभ की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक सोमवार से शुरू हुई जांच-पड़ताल के नतीजे सप्ताह अंत से आने शुरू हो जाएंगे। वाणिज्य कर विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर एके सिंह पर हुए हमले में भी आईटीसी फर्जीवाड़े के मामले पकड़ना एक प्रमुख वजह बताई जाती है।
जांच के दौरान पता लगा थी कि आईटीसी क्लेम के नाम पर वाणिज्य कर विभाग को करोड़ों की चपत लगाई गई है। क्लेम के मामलों का शत प्रतिशत सत्यापन भी नहीं होता था।
कमिश्नर (वाणिज्य कर) मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि आईटीसी के वेरिफिकेशन पूरे प्रदेश में एक साथ कराए जा रहे हैं। इससे बड़ी संख्या में फर्जी मामलों को पकड़े जाने की पूरी उम्मीद है। प्रत्येक माह के अंत में इसकी रिपोर्टिंग मुख्यालय में होगी। जल्द ही नतीजे सामने आएंगे।
इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) -:
मान लीजिए कोई व्यापारी 100 रुपये की कोई वस्तु किसी दूसरे व्यापारी से खरीदता है और इस पर 14 फीसदी की दर से टैक्स देता है। यानी वह उसे कुल 114 रुपये का भुगतान करता है। इसके बाद वही वस्तु किसी व्यापारी को दस रुपये मुनाफा कमाकर 110 रुपये में बेचता है और इस पर 14 फीसदी की दर से 15.40 रुपये टैक्स लेता है। अब विक्रेता व्यापारी पूर्व में दिए वैट की राशि का विभाग से रिफंड लेगा। यानी 14 रुपये रिफंड होंगे, और 1.40 रुपये वैल्यू एडेड टैक्स के रूप में विभाग अपने पास रख लेगा। इसी रिफंड के लिए किया जाने वाला क्लेम आईटीसी कहलाता है।
जीएसटी भी प्रमुख वजह
कानपुर। नई कवायद शुरू करने के पीछे गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) भी प्रमुख वजह बताई जा रही है। एक अधिकारी ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद कर की दरें देश भर में एक समान हो जाएंगी। उसके बाद आईटीसी के क्लेम बड़ी संख्या में आएंगे। अगले वित्तीय वर्ष में जीएसटी लागू होने के पहले सभी मामलों का निस्तारण जरूरी है, क्योंकि उसके बाद क्लेम के वेरिफिकेशन की नई व्यवस्था लागू हो जाएगी।
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