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बिकरू कांड से रिचा दुबे के आरोपों को जोडना ठीक नहीं

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कानपुर देहात। फर्जी आईडी से सिम लेने के मामले में विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे की तरफ से अधिवक्ताओं ने न्यायालय के क्षेत्राधिकार व आरोप पत्र पर संज्ञान लेने को लेकर प्रार्थना दिया। इस पर बहस हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दो जुलाई की घटना से रिचा दुबे को न जोड़ने का अनुरोध किया। साथ ही उस पर लगे आरोपों की सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट में होने पर आपत्ति की।
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बिकरू कांड के बाद विकास दुबे की पत्नी रिचा पर फर्जी आईडी से सिम लेने की रिपोर्ट चौबेपुर के प्रभारी निरीक्षक कृष्णमोहन राय ने 19 नवंबर 2020 को दर्ज कराई थी। इसकी सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट सुधाकर राय की अदालत में चल रही है। सोमवार को रिचा के अधिवक्ता सीपी शुक्ला व पवनेश कुमार शुक्ला ने इस प्रकरण की डकैती कोर्ट में होने पर आपत्ति जताते हुए प्रार्थना पत्र दिया। इस पर बहस हुई। इसमें बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि पुलिस की तरफ से लगाए गए आरोप प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट स्तर के कोर्ट में विचारण करने से संबंधित हैं। ये मामला एंटी डकैती कोर्ट में नहीं चलाया जाना चाहिए। रिचा पर लगे आरोप विशेष अधिनियम दस्यु प्रभावित क्षेत्र की सूची के अंतर्गत नहीं आते हैं।
अधिवक्ताओं ने कहा कि दो जुलाई 2020 को बिकरू में हुई घटना से रिचा को नहीं जोड़ा जाना चाहिए। ऐसे में इस प्रकरण की एंटी डकैती कोर्ट में सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने इस मामले में बहस सुनने के फैसला सुरक्षित कर लिया। दोनों अधिवक्ताओं ने कोर्ट से अनुरोध किया कि प्रार्थना पत्र का निस्तारण होने तक कोई अन्य आदेश जारी न किया जाए। अब सुनवाई की अगली तिथि 17 जनवरी तय की है।
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