70 के दशक के बाद इटावा की राजनीति में यह पहला मौका है जब मुलायम सिंह यादव का नाम चुनावी घमासान से दूर है। समाजवादी पार्टी की अभी तक जो सियासी लड़ाई मुलायम के इर्दगिर्द घूमती थी, उसका रुख इस बार अखिलेश बनाम शिवपाल के बीच झूल रहा है। पहले चाहे कांग्रेस रही हो या बसपा या फिर भाजपा। सभी दलों के चुनावी समीकरण मुलायम सिंह यादव के सियासी गुणा भाग को देखकर ही बनते बिगड़ते रहे हैं। ताजा राजनैतिक घटनाक्रम के बाद यह स्थिति साफ हो गई है मुलायम सिंह यादव सपा के प्रत्याशियों का चुनाव प्रचार करने मैदान में आ रहे हैं। इटावा में मुलायम सिंह के नाम पर एक बार फिर मतदाताओं का ध्रुवीकरण कर शिवपाल बनाम अखिलेश की जंग को काफी कद तक कंट्रोल करने की तैयारी है।
जानें, मुलायम का नाम चुनावी घमासान से क्यों होता जा रहा है दूर
मुलायम
सपा में डेमेज कंट्रोल के नाम पर मुलायम सिंह के नाम को आगे कर चुनावी हवा का रुख अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश शुरू हो गई है। यह सही है कि चार दशक से भी अधिक समय से मुलायम सिंह के नाम पर लड़ा जाने वाला चुनाव इस बार बगैर इस नाम के आधा अधूरा प्रतीत हो रहा था। मुलायम सिंह यादव ने विधानसभा चुनाव में सपा कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशियों के पक्ष में चुनाव प्रचार की हामी भर दी है। आने वाले समय में सपा इसका भरपूर राजनैतिक लाभ उठाने की कोशिश करेगी।
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आजादी के बाद सिर्फ तीन शुरुआती चुनाव ही मुलायम सिंह यादव के राजनैतिक दखल से पहले हुए हैं। 1969 में मुलायम ने जसवंतनगर विधानसभा सीट से पहला चुनाव लड़ा था और अपने पहले ही चुनाव में उन्होंने क्षेत्र में धमाकेदार एंट्री की थी। इसके बाद से चुनाव दर चुनाव न सिर्फ प्रदेश की राजनीति में कद बढ़ता गया बल्कि जिले की राजनीति के भी वह धुरी बन गए।1992 में समाजवादी पार्टी के गठन के बाद से जिले की राजनीति में वह टर्निंग प्वाइंट आया कि 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में जिले की सभी चारों सीटों जसवंतनगर, इटावा, भरथना और तत्कालीन लखना सुरक्षित सीट पर सपा का परचम फहरा।
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सपा को मिली इन जीतों से मुलायम सिंह यादव जिले की राजनीति के केंद्र बिंदु बनते गए। सदर सीट पर कभी जिस कांग्रेस का दबदबा रहा था। वह भी हाशिये पर सिमटती गई। जिले में मुलायम सिंह यादव के नाम पर चुनाव समीकरण फिट होते रहे। मगर इस बार सपा के अंदर मचे सियासी घमासान के चलते मुलायम सिंह यादव जिले की चुनावी बिसात से बाहर दिखे। उनके गृह जिले की सदर सीट से जहां अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने कुलदीप गुप्ता संटू को अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है तो पूरे प्रकरण से नाखुश चल रहे शिवपाल सिंह यादव का आशीर्वाद लेकर मुलायम के लोग में शामिल आशीष राजपूत ने भी इसी सीट से लोकदल से पर्चा भरकर सपा की अंदरूनी खींचतान को जाहिर किया है।
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अब मुलायम सिंह यादव के चुनाव प्रचार में आने से एक बार फिर राजनीति की धुरी मुलायम सिंह यादव के इर्द गिर्द घूमती नजर आएगी। उनके सामने आने से सपा में चल रही अंदरूनी उठापटक पर भी काफी हद तक अंकुश लग सकेगा। ग्राम प्रधान अकबरपुर राधाकृष्ण शाक्य, पूर्व प्रधान चौबिया अशोक यादव का कहना है कि मुलायम सिंह यादव देश के बहुत बडे़ नेता हैं। उनका इटावा ही नहीं पूरे देश में सम्मान है। हम सबके लिए यह गौरव की बात है कि उनकी जन्मभूमि इटावा है। उनके आदेश से कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा मिलेगी। उनके चुनाव प्रचार में आने से सपा मजबूत होगी।