पठानकोट की तरह कानपुर में भी आतंकी सेना की वर्दी पहनकर खुले आम घूम सकते हैं। सार्वजनिक क्षेत्रों के अलावा यहां के प्रमुख रक्षा प्रतिष्ठानों और एयरफोर्स स्टेशन को भी निशाना बना सकते हैं। दरअसल सेना की वर्दी और अन्य साज-ओ-सामान की बिक्री यहां बिना किसी प्रतिबंध के खुलेआम हो रही है।
एेसे में सेना ने ताजा गाइडलाइन जारी करते हुए आम नागरिकों से ऐसे कपड़े न पहनने और दुकानदारों से बिक्री रोकने की अपील भी जारी की है। सेना ने दुकानों में सैन्य वर्दी की खरीदी-बिक्री के लिए डीएम से लाइसेंस जरूरी कर दिया है।
दरअसल सेना ही अपनी वर्दी, बूट, टोपी, बैग, स्वेटर, तिरपाल के अलावा अन्य साज-ओ-सामान की नीलामी कर उन्हें पब्लिक के लिए उपलब्ध करवा रही है।
इसी नीलामी के बूते शहर में सेना के पुराने कपड़ों व वर्दी का बड़ा कारोबार पनप चुका है। यहां सेना की वर्दी के कपड़े का डेढ़ सौ करोड़ का कारोबार है। मेस्टन रोड में नए, परेड में पुराने कपड़ों का बाजारः सेना की वर्दी जैसे नए और पुराने कपड़ों, जूतों और अन्य तरह के सामान का कानपुर हब बनता जा रहा है।
शहर के मेस्टन रोड में सेना की वर्दी और वर्दी जैसे दिखने वाले कपड़े का बड़ा बाजार है। यहां 10 से अधिक थोक और इतने ही फुटकर विक्रेता हैं। इसी तरह परेड में सेना के डिस्पोजल कपड़ों की 15 से अधिक दुकानें हैं। कुछेक दुकानें जनरलगंज में भी हैं। सेना की वर्दी के कपड़े का शहर में करीब सौ करोड़ रुपये का कारोबार है। यहां के थोक दुकानों से आसपास के जिलों में भी माल सप्लाई होता है।
परेड की दुकानों से पुरानी वर्दी और जूतों की सप्लाई पीडब्ल्यूडी, नेशनल हाईवे, प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनियों और चौकीदारों के अलावा आम लोगों को की जाती है। यह कारोबार भी 50 करोड़ से अधिक का है।