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Kanpur: ईशा हत्याकांड में दोषी पूर्व दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह को उम्रकैद, सबूतों के अभाव में पांच बरी

Wed, 24 Sep 2025 08:18 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

पूर्व दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह ने पत्नी की हत्या कर शव कौशांबी में फेंका था। सिर्फ धड़ ही मिला, सिर की बरामदगी नहीं हो सकी थी।
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ईशा की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दस साल पहले हुए ईशा हत्याकांड में दोषी पूर्व दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह को अपर जिला जज चतुर्थ शुचि श्रीवास्तव ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। ज्ञानेंद्र पर पर 60 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं सबूतों के अभाव में पांच आरोपियों को बरी कर दिया गया है। काकादेव नवीन नगर निवासी विनीता सचान की बेटी ईशा ने मूसानगर थानाध्यक्ष रहे चित्रकूट निवासी ज्ञानेंद्र सिंह से 10 मार्च 2013 को शादी की थी।
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इसी साल उन्हें एक बच्चा भी हो गया लेकिन अचानक एक दिन ईशा को ज्ञानेंद्र के पहले से शादीशुदा होने की जानकारी मिली तो दोनों में विवाद हो गया। ईशा मायके आ गई फिर वर्ष 2015 में ईशा के मामा ने अपने घर पर दोनों को बुलाकर समझौता करा दिया। 18 मई 2015 को ज्ञानेंद्र ईशा के मायके पहुंचा और मां विनीता सचान से उनकी कार लेकर ईशा को मुक्तादेवी मंदिर में दर्शन कराने की बात कहकर साथ ले गया। विनीता और ईशा की रात आठ बजे तक बात हुई लेकिन इसके बाद ईशा और ज्ञानेंद्र दोनों का फोन बंद हो गया। विनीता काकादेव थाने पहुंची लेकिन पति-पत्नी का मामला बताकर उन्हें टरका दिया गया।

 

पूर्व दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला
एसएसपी के आदेश पर अगले दिन काकादेव थाने में ज्ञानेंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई। 22 मई को काकादेव एसओ को कौशांबी के महेवा घाट में एक सिरकटी लाश मिलने की सूचना मिली। इस पर विनीता अपने बेटे ऐश्वर्य राज, भाई अजय सचान व कुछ और लोगों के साथ कौशांबी पहुंची जहां टैटू, उंगली पर बंधी पट्टी, हाथ घड़ी व कुछ जेवरात को देखकर विनीता ने शव की शिनाख्त अपनी बेटी ईशा के रूप में की थी।
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ईशा की मां विनीता सचान और भाई ऐश्वर्य सचान - फोटो : अमर उजाला
एडीजीसी प्रदीप वाजपेई व वादी के अधिवक्ता विष्णु कुमार सिंह ने बताया कि मुकदमे की विवेचना के बाद पुलिस ने चित्रकूट निवासी ज्ञानेंद्र सिंह, ट्रैवल एजेंसी संचालक निराला नगर निवासी मनीष कठेरिया व उसके भाई बच्चा कठेरिया, बारादेवी निवासी अर्जुन सिंह व अवंतिका और दामोदर नगर निवासी आदर्श कुमार सविता के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में पेश की थी। अभियोजन की ओर से 11 जबकि बचाव पक्ष की ओर से दो गवाह कोर्ट में पेश हुए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने ज्ञानेंद्र को दोषी मानकर सजा सुनाई। अधिवक्ता सुधीर द्विवेदी और मो. सलीम ने बताया कि अभियोजन अपनी कहानी को साबित करने के लिए कोर्ट में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका जिसके चलते कोर्ट ने मनीष कठेरिया, बच्चा कठेरिया, अर्जुन सिंह, अवंतिका और आदर्श कुमार सविता को बरी कर दिया।
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