कानपुर देहात। जिले के रिंद व सेंगुर नदी पर बनाए गए चार चेकडैम के निर्माण से लेकर भुगतान करने तक लघु सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने खूब मनमानी की। इस बात का खुलासा टीएसी जांच में हुआ है। इसके पहले की हुई जांचे करीब एक साल से ठंडे बस्ते में पड़ी थीं। मनमानी के खुलासे के बाद अब कई अधिकारियों के ऊपर कार्रवाई की तलवार लटकी है।
लघु सिंचाई विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में रिंद नदी पर बड़ापुर निगोहिया में 58 लाख, सुंदरपुर गजेन में 63 लाख, रतनपुर खास में 51.88 लाख और सेंगुर नदी पर फत्तेपुर डेरापुर करीब 50 लाख की लागत से चेकडैम का निर्माण हुआ। कार्यदायी संस्था फर्म मेसर्स नेशनल एंटरप्राइजेज, कानपुर तथा मेसर्स शीलू कुमार कंस्ट्रक्शन, शांति कॉलोनी, इटावा को काम मिला। कार्यदायी संस्था ने मनमाने ढंग से काम किया वहीं जिम्मेदार भी गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से अनजान रहे। निर्माण के बीच में ही स्थानीय लोगों ने गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए मानक विहीन कार्य कराने के आरोप लगाए।
शिकायत हुई कि सुंदरपुर गजेन का चेकडैम निर्धारित स्थल से करीब एक किलोमीटर नीचे बनाया गया है। इससे यह उपयोगहीन है। वहीं, निर्माण मानक के अनुरूप स्वीकृत पत्थरों का प्रयोग नहीं हुआ है। मामला तत्कालीन जिलाधिकारी आलोक सिंह तक पहुंचा तो अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई ने 21 मार्च 2025 को जांच कर रिपोर्ट दी कि काम अधूरा है और गुणवत्ताविहीन है, इसके छह दिन बाद ही एक टीम गठित कर भौतिक सत्यापन कराते हुए 31 मार्च को सभी चेकडैम का भुगतान कर दिया, जबकि चेकडैम का निर्माण कार्य अधूरा था। इसके बाद कई जांचे हुईं लेकिन विभागीय अधिकारियों की सांठ-गांठ से पर्दा डाला जाता रहा।
जिलाधिकारी कपिल सिंह ने इस मामले को संज्ञान में लेकर टीएसी जांच की संस्तुति कमिश्नर कानपुर से की। इसके बाद टीएसी ने लघु सिंचाई विभाग के अधिकारियों की सांठ-गांठ और लापरवाही की पोल खोल दी। अब एक एक्सईएन, सात जेई पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। वहीं कई अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। जिलाधिकारी कपिल सिंह ने बताया कि शासन के कार्यों में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चेकडैम निर्माण में बरती गई लापरवाही पर जो भी दोषी होंगे उन पर सख्त कार्रवाई होगी।
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जल्दबाजी में भुगतान कर फंस गए जिम्मेदार
चेकडैम निर्माण विभागीय अधिकारियों ने भुगतान के समय नियमों को दरकिनार कर दिया। विभाग के एक्सईएन ने जहां 21 मार्च को दी गई रिपोर्ट में काम अधूरा बताया, वहीं पांच दिन बाद 31 मार्च 2025 को चारो चेकडैम का करीब 90 फीसद भुगतान कार्यदायी संस्थाओं को कर दिया। निर्माण कार्य पूरा बिना भुगतान किए जाने से ही गड़बड़ी की पोल खुल कर सामने आ गई। बताया जा रहा कि जिन जेई के देखरेख में काम कराया जा रहा था, उन्होंने एमबी करने से मना भी किया था। लेकिन विभाग ने सांठ-गाठ कर अन्य जेई से एमबी करा ली।
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पीडी की जांच में भी पाई गई थी बड़ी गड़बड़ी
-तत्कालीन जिलाधिकारी आलोक सिंह के सामने चैकडेम निर्माण में गड़बड़ी की बात सामने आई तो परियोजना निदेशक डीआरडीए वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में एक तीन सदस्यीय टीम बनाई गई। इसमें जेई डीआरडीए, एई डीआरडीए को शामिल किया गया। जांच टीम ने सात मई 2025 को फोटो समेत रिपोर्ट दी कि निर्माण अधूरा, अधोमानक है। इसके बाद भी भुगतान कर दिया। इस रिपोर्ट के बाद एक्सईएन को नोटिस जारी हुई थी। इसके बाद कार्रवाई बढ़ती डीएम का तबादला हो गया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
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टीएसी जांच रिपोर्ट से कार्रवाई आगे बढ़ी
-चैकडेम निर्माण में गड़बड़ी का मामला जिलाधिकारी कपिल सिंह के संज्ञान में आया तो उन्होंने जिले स्तर पर एक टीम गठित की। इसमें एक्सईएन पीडब्लूडी, एक्सई सिंचाई, एक्सईएन आरईडी से जांच कराई। जांच टीम ने रिपोर्ट दी निर्माण कार्यों में खामियां नजर आ रहीं हैं। इसके बाद जिलाधिकारी ने टीएसी से जांच कराने के लिए कमिश्नर को लिखा था। इस पर कमिश्नर के विजेंद्र पांडियन ने अपर आयुक्त प्रदीप कुमार, अधीक्षण अभियंता लोक निर्माण अनिल कुमार सिंह, एक्सईएन सिंचाई कानपुर नगर, डीडीओ कन्नौज ने जांच कराई। जांच टीम ने निर्माण, भुगतान की प्रक्रिया को अनियमित बताते रिपोर्ट दी। इसके बाद कमिश्नर ने शासन को कार्रवाई के लिए लिखा।अब आशीष कुमार श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता, लघु सिंचाई खंड, कानपुर के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही प्रारंभ की गई है। इसके अलावा दोषी पाए जाने पर शासन ने रामसूरत यादव, मनोज कुमार कुशवाहा, अरुण कुमार सिंह, पवन कुमार सिंह, चंद्रिका प्रसाद, अनंत तिवारी, रमेश कुमार अवर अभियंताओं के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्यवाही की है। वहीं कार्यदायी संस्थाओं को काली सूची में डाला है।
फत्तेपुर चेक से किसानों के खेतों की हो रही कटान
डेरापुर। सेंगुर नदी पर किसानों की सिंचाई और पशुओं के लिए वर्ष भर पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से फत्तेपुर में बनाए गए चेक डैम का अपेक्षित लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। किसानों का आरोप है कि चेक डैम के किनारे किए गए कटाव को अब तक बंद नहीं किया गया, जिससे नदी का पानी लगातार बह जाता है और जल संचयन नहीं हो पा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार गर्मियों के मौसम में सेंगुर नदी सूख जाती थी, जिससे फसलों की सिंचाई और पशुओं के लिए पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती थी। किसानों की मांग पर विभाग ने फत्तेपुर में चेक डैम का निर्माण कराया था। करीब एक वर्ष पूर्व चेक डैम में दो युवकों के डूबने की घटना के बाद सुरक्षा कारणों से इसके बगल से कटाव कर दिया गया था। इसके बाद से आज तक उस कटाव को बंद नहीं किया गया। किसानों का कहना है कि कटाव खुले रहने से नदी का पानी चेक डैम में रुकने के बजाय सीधे निकल जाता है, जिससे जल संरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है। किसान जयप्रकाश, कृष्ण मोहन, सतीश नारायण और राकेश यादव ने बताया कि यदि निर्माण के समय चेक डैम को दोनों किनारों तक पूरी तरह बनाया जाता तो पानी का बहाव रुकता और क्षेत्र के किसानों को सिंचाई का लाभ मिलता। संवाद