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UP: देश में सबसे गर्म रहा बांदा; IPS बोले- पहाड़-नदियां बचाने को 10 साल थमे खनन, मुख्यमंत्री से रखी यह मांग

Sun, 24 May 2026 08:32 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: एमपी कैडर के 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी एवं मध्यप्रदेश में एडीजी रेलवे के पद पर तैनात राजा बाबू सिंह ने बुंदेलखंड में लगातार बढ़ते तापमान को लेकर चिंता जताई है।
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Ban on Mining in Bundelkhand - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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बुंदेलखंड में प्रकृति के अंधाधुंध दोहन और उससे पैदा हुए विनाशकारी संकट को लेकर प्रशासनिक हलकों से एक बेहद बड़ी और साहसिक आवाज उठी है। मध्य प्रदेश कैडर के 1994 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और वर्तमान में एडीजी रेलवे के पद पर तैनात राजा बाबू सिंह ने अपने गृह जनपद बुंदेलखंड के पर्यावरण को बचाने के लिए सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। मूल रूप से बांदा के रहने वाले आईपीएस राजा बाबू सिंह ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि बांदा, महोबा और हमीरपुर जिलों में अगले 10 वर्षों के लिए रेत और पत्थर के सभी प्रकार के खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए।

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देश का 'सबसे गर्म' शहर बना बांदा, पारा 48 डिग्री पार

वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की यह चिंता और मुख्यमंत्री को लिखा गया यह पत्र ऐसे समय में आया है, जब पूरा बुंदेलखंड भीषण लू और पानी के हाहाकार से तड़प रहा है। हाल ही में बांदा का तापमान देश में सबसे ज्यादा 48 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इस रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने न सिर्फ आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, बल्कि पर्यावरणविदों को भी डरा दिया है। पत्र में आईपीएस राजा बाबू सिंह ने साफ शब्दों में कहा है कि बांदा का 48 डिग्री के पार पहुंचना कोई सामान्य प्राकृतिक चक्र नहीं है, बल्कि यह इंसानी लालच के कारण प्रकृति के साथ किए गए खिलवाड़ का सीधा नतीजा है।

Ban on Mining in Bundelkhand - फोटो : amar ujala

डायनामाइट से उड़ते पहाड़ और छनती नदियां बुंदेलखंड को बना देंगी रेगिस्तान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए पत्र में राजा बाबू सिंह ने बुंदेलखंड की भौगोलिक स्थिति का दर्द बयां किया है। उन्होंने लिखा महोबा और बांदा की हरी-भरी पहाड़ियों को क्रशर मालिक डायनामाइट से उड़ा रहे हैं। प्राचीन पहाड़ अब मैदान बनते जा रहे हैं। वहीं, हमीरपुर और बांदा में केन व बेतवा जैसी जीवनदायिनी नदियों का सीना पोकलैंड मशीनों से चीरा जा रहा है। अत्यधिक रेत खनन के कारण इन जिलों का भूगर्भ जल स्तर पाताल में चला गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बुंदेलखंड के इन तीन जिलों में रेत और पत्थर का अवैध व अंधाधुंध दोहन तुरंत नहीं रोका गया, तो अगले कुछ वर्षों में यह पूरा इलाका इंसानों के रहने लायक नहीं बचेगा और मरुस्थल में तब्दील हो जाएगा।

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Ban on Mining in Bundelkhand - फोटो : amar ujala

मुख्यमंत्री से आईपीएस राजा बाबू सिंह की 3 बड़ी मांगें:

वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने बुंदेलखंड को इस महासंकट से निकालने के लिए मुख्यमंत्री के सामने तीन मुख्य सुझाव रखे हैं, जिन पर तत्काल अमल की जरूरत है:

  • 10 साल का पूर्ण प्रतिबंध: बांदा, हमीरपुर और महोबा में चल रहे सभी पत्थर के क्रशरों और बालू खनन के पट्टों को अगले 10 वर्ष के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए, ताकि प्रकृति को खुद को दोबारा जीवित करने का समय मिल सके।

  • वृहद हरित पट्टी का निर्माण: खनन पर रोक लगाने के साथ ही इन पहाड़ियों और नदियों के किनारों पर युद्धस्तर पर स्थानीय प्रजाति के पौधों का रोपण किया जाए, जिससे गिरते जलस्तर को रोका जा सके।

  • कड़ी कानूनी कार्रवाई: जो सिंडिकेट नियमों को ताक पर रखकर रात-दिन प्राकृतिक संपदा को लूट रहा है, उन पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

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