आईपीएस भानु भास्कर ने शनिवार को एडीजी जोन कानपुर का पदभार संभालने के बाद जिलों के कप्तानों को अपने-अपने जनपद के माफिया का ब्योरा जुटाने के निर्देश दिए। कहा, माफिया के अवैध कब्जों पर बुलडोजर चलवाएं। पुलिस विभाग में फैले भ्रष्टाचार पर भी सख्त निर्देश दिए। कहा, रिश्वतखोरी में पकड़े जाने पर पुलिसकर्मियों पर विभागीय के साथ कानूनी कार्रवाई (एफआईआर) भी की जाए।
शांति पूर्ण पंचायत चुनाव करवाना प्राथमिकता
एडीजी का कहना है कि शांति पूर्ण पंचायत चुनाव करवाना उनकी प्राथमिकता में है। इस संबंध में जोन के कप्तानों के साथ मीटिंग कर रणनीति तैयार की जाएगी। खासकर उन क्षेत्रों की जो बेहद संवेदनशील हैं। इसमें बिकरू गांव शीर्ष पर है।
लंबित विवेचनाएं खत्म हों, महिला व बच्चों संबंधी अपराध पर सख्ती
एडीजी ने डीआईजी समेत अन्य जिलों के अफसरों से लंबित विवेचनाओं का विवरण मांगा है। कहा कि लंबित विवेचनाएं जल्द खत्म की जाएं। दोषियों के खिलाफ मजबूत पैरवी कर सख्त सजा दिलाई जाए। बिकरू कांड का अलग से ब्योरा लिया। एडीजी ने कहा कि महिला व बच्चों संबंधी अपराध में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीआईजी, एसएसपी व एसपी की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे मामलों की खुद निगरानी करें।
सीबीआई में रहे 15 साल
1996 बैच के आईपीएस भानु भास्कर मूलरूप से बलिया के रहने वाले हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहर लाल नेहरू विवि. से स्नातक, परास्नातक व एमफिल की पढ़ाई की। वह लखनऊ, मथुरा, रामपुर, औरैया, बरेली और वाराणसी में एएसपी, एसपी व एसएसपी रहे।
आगरा और फैजाबाद रेंज में डीआईजी के साथ इलाहाबाद जीआरपी में भी डीआईजी रहे। बतौर डीआईजी पीटीसी मेरठ भी रहे। सीबीआई में करीब 15 साल (पहले कार्यकाल में 2003 से 2010 और दूसरे में 2013 से 2021 तक) प्रति नियुक्ति पर रहे। सीबीआई में वह पहले एंटी करप्शन पॉलिसी डिवीजन में एसपी रहे। बाद में ज्वाइंट डायरेक्टर सीबीआई बने। बिहार में शेल्टर होम वाले केस की जांच से लेकर सुनवाई पूरी करवाने तक उनकी अहम भूमिका रही।
उपलब्धियां
- 2006 में चिवनिंग फेलोशिप मिली
- नेशनल डिफेंस कॉलेज 60वें बैच में हाईयेस्ट स्ट्रेटेजिक मैनेजमेंट का कोर्स किया
- 2007-08 में एचएचएच हम्फे प्रोग्राम के तहत फुलब्राइट फेलोशिप मिली
- 2015 में कनाडा के ओटवा से रॉयल कैनेडियन माउंटटेड पुलिस कोर्स किया।