कानपुर। चौबेपुर इंस्पेक्टर से 225 करोड़ की साइबर ठगी के मामले की विवेचना छीन ली गई है। उन पर आरोप है कि चार खाता धारकों को उठाकर पूछताछ करने के बाद रुपये लेकर छोड़ दिया है। डीसीपी ने विवेचना इंस्पेक्टर बिल्हाैर सुधीर कुमार को सौंपी है और मामले की जांच एडीसीपी वेस्ट राजेश कुमार पांडेय को दी गई है।
15 जून को पश्चिम जोन की साइबर सेल ने शिवराजपुर से साइबर ठगों का गिरोह को पकड़ा था। गिरोह म्यूल खाते उपलब्ध कराता था। मास्टरमाइंड शिवराजपुर के दरियानिवादा निवासी अशरफ खान था उसे अरौल के सूरज कुमार, कन्नौज के ठठिया बेहटा निवासी राजन कटियार, कुकरी के राजदीप, भीमरतन और कमल संग गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इनके पास से 450 म्यूल खातों की जानकारी मिली थी। इन खातों में करीब 225 करोड़ रुपये के लेनदेन होने के साक्ष्य मिले थे। मामले की विवेचना शिवराजपुर थानेदार को करनी थी लेकिन थाने की कमान दरोगा अमित कुमार के पास है जबकि आइटी एक्ट के मामलों की विवेचना इंस्पेक्टर व उनके ऊपर के अधिकारी करते हैं। ऐसे में विवेचना चौबेपुर इंस्पेक्टर दुर्गेश मिश्रा को दी गई थी। जिन लोगों के खातों में ठगी की रकम पहुंची उनमें से चार को थाने में पूछताछ के लिए लाया गया था। इस दौरान चर्चा रही कि पूछताछ के बाद रुपये लेकर छोड़ा गया है। इसकी सूचना शनिवार को पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल को हुई तो उन्होंने डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी को फोन कर विवेचक बदलने के निर्देश दिए। इसके बाद विवेचना चौबेपुर इंस्पेक्टर से हटाकर इंस्पेक्टर बिल्हाैर सुधीर कुमार को और रुपये लेने की जांच एडीसीपी राजेश कुमार पांडेय को साैंपी है। डीसीपी पश्चिम ने बताया कि जिनसे रुपये लेने का आरोप है उनमें से दो लोगों ने रुपये देने से इन्कार किया है। कहा कि आधार कार्ड मांगे है।