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अमेरिका में रह रहीं कानपुर की प्रियंका ने कुछ इस अंदाज में बताई अपनी 'ड्रीम डिजायर' 

Thu, 13 Dec 2018 06:11 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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माइक्रोसॉफ्ट की चीफ इंजीनियर प्रियंका श्रीवास्तव
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अमेरिका केसिएटल में रह रहीं माइक्रोसॉफ्ट की चीफ इंजीनियर प्रियंका श्रीवास्तव को जब अपने शहर कानपुर में एयरपोर्ट शुरू होने की जानकारी मिली, तो वह खुश हो गईं। इसके बाद अतीत के पटल से स्मृतियों का झुंड निकल पड़ा। कभी कूड़ा, तो कभी फुटपाथ, मेडिकल कालेज की लेन, लिटिल सेफ की डिश, एचबीटीआई का कैंपस, सेंट मैरी कॉन्वेंट, शहर का कोहरा-धुंध, प्रदूषण और पता नहीं क्या-क्या एक सांस में पूछ डाला। स्मृतियों का वेग थमा तो अपनी ‘ड्रीम डिजायर’ जताई। बोलीं कि काश हमारा कानपुर भी सिएटल जैसा साफ-सुथरा रहे।
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अमर उजाला ने विदेश में रह रहे शहरियों को कानपुर कनेक्ट करने के लिए मुहिम शुरू की है। इसके तहत हमने सबसे पहले प्रियंका श्रीवास्तव से बातों का सिलसिला शुरू किया। वह प्रदेश के प्रथम गुर्दा रोग विशेषज्ञ और कानपुर मेडिकल कालेज (जीएसवीएम) के पूर्व मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार की बेटी हैं। लखनऊ के रहने वाले उनके पति अमिताभ श्रीवास्तव माइक्रोसॉफ्ट के वाइस प्रेसीडेंट (सेल्स) हैं। प्रियंका का बचपन जीएसवीएम मेडिकल कालेज परिसर में गुजरा है। पढ़ाई-लिखाई सेंट मैरीज स्कूल में हुई। इसकेबाद एचबीटीआई से मेकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। तभी शादी हो गई और अमेरिका शिफ्ट हो गईं। प्रियंका श्रीवास्तव अपने पति और तीन बच्चों केसाथ चार साल पहले शहर आई थीं। इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली में उतरीं, उसके बाद ट्रेन से उन्हें कानपुर आना था, लेकिन ट्रेन के किसी कारण निरस्त होने से उन्हें बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा। कहती हैं कि ट्रेन से आने में कचूमर निकल गया। तभी से सोच रही थी कि कानपुर में एयरपोर्ट बन जाए।

प्रियंका से बातों का सिलसिला छिड़ा तो सबसे पहले सड़कों में बिखरी गंदगी केबारे में पूछा और बारिश में जलभराव की स्थिति। बोलीं कि लड़कपन में जब बाहर निकलते तो सोचते थे कि पैर कहां पर रखें? इसके बाद बोलीं कि अब तो लोग कूड़े के ढेर न जलाते होंगे। प्रदूषण इतना बढ़ गया है? जाड़े में धुंध और कोहरा तो बहुत होगा? इसके बाद पार्किंग केसंबंध में पूछने लगीं। बोलीं कि मॉल वगैरह में अब तो पार्किंग की व्यवस्था हो गई होगी। फिर जेकेमंदिर केलॉन में उछलने-कूदने की बात याद आ गई। सबसे ज्यादा खुशी उन्हें हरकोर्ट बटलर इंस्टीट्यूट के विश्वविद्यालय बनने पर हुई है। बोलीं कि आऊंगी तो इंस्टीट्यूट जरूर जाऊंगी। वाइस चांसलर, डीन से मिलूंगी। बताया कि कानपुर की बहुत याद आती है। जब भी पापा-मम्मी से बात होती है तो सब कुछ निगाह केसामने घूमने लगता है। काश, सिएटल की तरह अपना कानपुर भी साफ-सुथरा और व्यवस्थित हो जाए।
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प्रोफाइल
-शुरुआती शिक्षा कानपुर के सेंट मैरीज कॉन्वेंट से की। इसके बाद वर्ष 1995 में एचबीटीआई से बीटेक किया। फिर अमिताभ श्रीवास्तव से शादी के बाद 1997 में अमेरिका चली गईं। वहां अटलांटा के जार्जिया टेक्निकल इंस्टीट्यूट से एमएस (मास्टर आफ साइंस) कोर्स किया। इसके फौरन बाद नोकिया ज्वाइन किया। एक साल कोकाकोला में चीफ इंजीनियर रहीं। वर्ष 2010 में बिल गेट्स की कंपनी माइक्रोसॉफ्ट में चीफ इंजीनियर हो गईं।

वर्ष 2002 ट्रिप्लेट पैदा हुए
-माइक्रोसॉफ्ट की चीफ इंजीनियर प्रियंका श्रीवास्तव के यहां वर्ष 2002 में एक साथ तीन बच्चे (ट्रिप्लेट) दो बेटे आकाश, अजय और एक बेटी अंजलि पैदा हुई। वह बताती हैं कि जब शॉपिंग के लिए बच्चों को मॉल ले जाते तो अमेरिकी उन्हें खूब दुलराते। तीनों बच्चों के लिए कपड़े, खिलौने आदि खरीदने पर दुकानदार दो बच्चों के सामान का ही पैसा लेते और एक को गिफ्ट देते। डिलेवरी के बाद तीनों बच्चे एक महीने तक एनआईसीयू में रहे थे।

नोटः अगर आपका भी कोई रिश्तेदार या संबंधी विदेश में रह रहा है। वह मूल रूप से कानपुर का रहने वाला हो तो हमसे संपर्क करें। हम प्रमुखता से उनकी कहानी प्रकाशित करेंगे। 
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knp-cityreporter@knp.amarujala.com
 
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