एनजीटी की तरफ से गठित उत्तर प्रदेश सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट मॉनिटरिंग कमेटी के चेयरमैन रिटायर्ड जज देवी प्रसाद सिंह के अनुसार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लापरवाही से कानपुर शहर की स्थिति बदतर हुई है। यदि बोर्ड ठीक से काम करता तो ये नौबत न आती। दीपावली पर तीन गुना ज्यादा पटाखे छुड़ाए जा सकते थे, फिर भी प्रदूषण की ऐसी स्थिति न बनती। यहां से भेजी गई रिपोर्ट में सभी इंडस्ट्री और नाले ठीक हैं लेकिन शुक्रवार को मौके पर सब गड़बड़ मिला। बोर्ड के खिलाफ एनजीटी को लिखा है।
चेयरमैन के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम ने कूड़ा निस्तारण प्लांट, हैलट और जाजमऊ का निरीक्षण कर अफसरों को निर्देश दिए। सर्किट हाउस में समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से देवी प्रसाद सिंह ने बताया कि पनकी भऊ सिंह नगर स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट से गंदगी पांडु नदी के माध्यम से गंगा में पहुंच रही है। इसे रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए।
46 एकड़ के प्लांट में वर्षों से जमा कूड़ा शहर के लिए जहर है। कूड़ा उड़ने से आसपास की हवा प्रदूषित हो रही है। हवा की गुणवत्ता खराब होने का बड़ा कारण खुले कूड़ाघर हैं जिन्हें बंद किया जाए। इनसे पेट रोगों से लेकर कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा है। उन्होंने नगर आयुक्त से कहा कि प्लांट में कूड़ा ढका जाए। डेढ़ महीने बाद एक भी खुला कूूड़ा न दिखे। सभी को स्वच्छ हवा मिलनी चाहिए।