फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भरी आंखें, जुबां पर एक ही सवाल, कहां तुम चले गए

Mon, 21 Nov 2016 10:47 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
पुखरायां ट्रेन हादसे के बाद की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
अपनों की तलाश में सोमवार को दूर-दूर से सैकड़ों लोग पुखरायां पहुंच रहे थे। इनकी आंखों में आंसू थे और जुबां पर एक ही सवाल था कि कहां तुम चले गए। घटनास्थल पर कोई बोगी से निकाले गए सामान को देखकर अंदाजा लगाना चाहता था तो कोई बोगियों से शव के निकलते ही चेहरा दिखाने की जिद करते हुए पुलिस का घेरा तोड़कर आगे बढ़ जाता था... जैसे ही अपनों के बारे में जानकारी मिलती तो कोई पोस्टमार्टम तो कोई अस्पताल की तरफ दौड़ पड़ता।
विज्ञापन


भाई को तलाशने पटना से आए
शिकारपुर पटना से भाई विजय कुमार और उनकी पत्नी शकुंतला देवी को तलाशने आए राजकुमार उनका सामान देखकर फफक पड़े। यह लोग उज्जैन से पटना जा रहे थे। राजकुमार रोते हुए तहसीलदार एआर फारुकी से बोले, साहब अब सामान का क्या करेंगे। बाद में तहसीलदार ने समझाया तो ट्राली और बैग लिए। बैग खोला तो उज्जैन में महाकालेश्वर के सामने भाई और भाभी की फोटो निकली। यह देख राजकुमार की दहाड़ मारकर रोने लगे।

कोई तो बताए मेरी मां कहां
गाजीपुर से अपनों की तलाश में आए निर्मल घटनास्थल पर बदहवास हालत में थे। वह अफसरों से कह रहे थे कि बड़ी भाभी देवंती देवी, भाई राकेश सोनी और भतीजी पूजा की मौत की पुष्टि हो चुकी है। उनकी लाशें मिल गई हैं लेकिन अभी तक मां कौशल्या का पता नहीं चल रहा है। जैसे ही कोच से कोई शव निकालकर लाया जाता तो वह चिल्लाने लगते, साहब एक बार चेहरा दिखा दो।
विज्ञापन


लापता मामा को ढूंढने आई भांजी
अजीतमल की रीना लापता अपने मामा लल्लू प्रसाद को ढूंढने घटनास्थल पर पहुंची। उसने बताया कि मामा सागर से आ रहे थे उन्हें कानपुर उतरना था। उनका कोई पता नहीं चल रहा है। सभी अस्पतालों और पोस्टमार्टम हाउस में पता कर आई हैं लेकिन कोई भी कुछ भी नहीं बता पा रहा है।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें