मर्चेंट चैम्बर हाॅल में संगीत नाटक अकादमी द्वारा आयोजित देशज कार्यक्रम में नौटंकी का मंचन करते कलाकार ।
- फोटो : amarujala
कानपुर। भारत संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली और िद ग्रेट गुलाब थियेटर कंपनी कानपुर की ओर से मर्चेंट चैंबर हाॅल में आयोजित लोक एवं पारंपरिक अभिव्यक्ति के उत्सव ‘देशज’ के दूसरे दिन गीत-संगीत का रंग जमा। राजस्थान के केहरी सिंह की टीम ने नक्कार वादन किया। भपंग (वाद्य यंत्र) वादक ने एक अलग लय सुनाकर वाहवाही बटोरी। गुरुवार को ‘देशज’ का आगाज नौटंकी के संक्षरण से हुआ। आपस में संवाद हुआ और कहा गया कि दिल्ली के युवा नौटंकी करने को तैयार हैं लेकिन कानपुर या कन्नौज के नहीं। इसी वजह से नौटंकी कला को बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है। इससे पहले प्रेक्षक और संगीत परंपरा के विशेषज्ञ राम नारायण बाजार गए, जिसे वाद्य यंत्रों की मंडी बोला जाता है। विशेषज्ञों ने मंच डिजाइनर नौशाद से मिलकर फीडबैक लिया। यह टीम शुक्रवार को बाकरगंज जाएगी और नौटंकी से संबंधित जानकारी लेगी। संगीत नाटक अकादमी के उप सचिव सुमन कुमार और डॉ. अकमल रिजवी ने बताया कि नौटंकी को जीवंत बनाने की कोशिश चल रही है।
भारतीय लोक कला महासंघ के अध्यक्ष और प्रख्यात लोक नाट्य विशेष अतुल यदुवंशी ने कहा कि अब नौटंकी का कथानक, विषय वस्तु बदला गया है। मुंशी प्रेमचंद, कालीदास और फणीश्वर नाथ रेणु के कथानक को आधार बनाकर नौटंकी पेश की जा रही है, जिसमें अश्लीलता का जरा से पुट नहीं है। शुक्रवार को बूढ़ी काकी की प्रस्तुति इसी आधार पर दी जाएगी। इसमें 35 कलाकार हिस्सा लेंगे।
कर्मेव धर्म: (नौटंकी)
भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ से रंग मंच का ज्ञान लेकर निकली चित्रा सिंह की टीम ने अभिनय करके कर्म को प्रधान बताया। नौटंकी के माध्यम से संदेश दिया कि काम छोटा या बड़ा नहीं होता है। नौटंकी में एक अहंकारी तपस्वी, एक पतिव्रता स्त्री और कल्लू कसाई की कथा प्रस्तुत की गई। सार बताया गया कि छूत-अछूत और आडम्बरों से ऊपर उठकर इंसान, इंसानियत से प्यार करना चाहिए। नौटंकी का निर्देशन चित्रा सिंह ने किया। राघवेंद्र तिवारी ने रंगा और रोहित कुमार ने बिल्ला का दमदार किरदार निभाया। चिया जोशी ने रंगी और नेहा शर्मा ने बिल्ली की भूमिका अदा की। सुधीर रिखारी ने तपस्वी, गौतम यादव ने कौवा, वंदना शर्मा ने शीलवती, निशा भटनागर ने महिला, प्रिंस राजपूत आदमी/पति, मोहम्मद फहीम ने कल्लू कसाई, अशोक सिंह मिरल ने सांप का रोल निभाया। कुसुमलता, किरन, नूरजहां, कल्पना चौहान नर्तकी की भूमिका मेें नजर आईं। आलेख जयवर्धन, गायन, संगीत निर्देशन जेपी सिंह और जमील खां, नृत्य निर्देशन अनीस, प्रकाश परिकल्पना, जेपी सिंह, मेकअप अनुराग कौशिक का रहा। राजेश पाठक ने हारमोनियम, जमील खां ने नक्कारा और ढोलक पर मुंशी खां ने रंग जमाया।