मेटामैटीरियल सरफेस क्लोकिंग सिस्टम ‘अनालक्ष्य’ का लोकार्पण करते एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित साथ में अन
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भारतीय सेना के जवानों, प्लेन और ड्रोन को दुश्मनों से सुरक्षित रखने का बीड़ा आईआईटी कानपुर ने उठाया है। आईआईटी ने मेटामैटीरियल का इस्तेमाल कर ऐसा कपड़ा तैयार किया है जो दुश्मनों की रडार, सैटेलाइट इमेज, इंफ्रारेड कैमरों, ग्राउंड सेंसर और थर्मल इमेजिंग की पकड़ में नहीं आएगा। इससे गाड़ियों के कवर, प्लेन को ढकने का टेंट और जवानों की ड्रेस तैयार की जा सकती है। यह पूर्ण रूप से स्वदेशी है और विदेश से मिलने वाले कपड़े से छह से सात गुना तक सस्ता होगा।
मंगलवार को आईआईटी के प्रो. राकेश मोटवानी सभागार में मुख्य अतिथि एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित और आईआईटी निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने मेटामैटीरियल सरफेस क्लोकिंग सिस्टम ‘अनालक्ष्य’ का लोकार्पण किया है। इसे मेटातत्व कंपनी तैयार कर रही है। कंपनी का दावा है कि वह सेना की जरूरत पूरा करने को तैयार है। आईआईटी कानपुर के स्थापना दिवस पर लगी डिफेंस स्टार्टअप प्रदर्शनी में भी इस कपड़े का प्रदर्शन हुआ था, जिसे काफी सराहा गया था। इसमें बताया गया था कि सैनिक और बख्तरबंद वाहन दुश्मन के रडार, गति का पता लगाने वाले ग्राउंड सेंसर और थर्मल इमेजिंग सिस्टम से बचने के लिए इस मेटामैटीरियल का उपयोग कर सकते हैं। आईआईटी की ओर से कपड़ा देश की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सैनिक वर्दी और जमीनी वाहनों के कवर के अलावा शोधकर्ताओं ने उच्च गति वाले विमानों के लिए मेटामैटीरियल का एक और अधिक मजबूत संस्करण भी तैयार किया है।
उद्घाटन समारोह में एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा कि सिंथेटिक अपर्चर रडार सिस्टम से लेकर सैटेलाइट इमेज व ट्रैकिंग तक कई ऐसे तरीके हैं जो सेना के लिए हमेशा चुनौती बने हुए हैं। यह तकनीक निश्चित ही सेना के कंधों को मजबूत करेगी। आईआईटी निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में यह बड़ा कदम है।
दुश्मनों की कई तकनीक को देगा मात
आईआईटी के तीन वैज्ञानिकों प्रो. कुमार वैभव श्रीवास्तव, प्रो. एस अनंत रामाकृष्णन और प्रो. जे रामकुमार की टीम ने इस मेटामैटीरियल को तैयार किया है। 2018 में इसके पेटेंट के लिए आवेदन भी किया गया था, जो जारी हो गया है। पिछले छह साल से इस टेक्नालाॅजी का सेना के साथ ट्रायल किया जा रहा है। प्रो. कुमार वैभव ने 2010 में इस पर काम शुरू किया था। बाद में प्रो. एस अनंत रामाकृष्णन और प्रो. जे रामकुमार ने मिलकर इसे उत्पाद में बदला। 2019 में जब भारतीय सेना रडार से बचने की तकनीक खोज रही थी तब उसे आईआईटी के रिसर्च की जानकारी मिली। प्रो. एस अनंत रामाकृष्णन ने बताया कि यह मैटीरियल रडार, सैटेलाइट इमेज, इंफ्रारेड कैमरों, ग्राउंड सेंसर और थर्मल इमेजिंग को धोखा दे सकता है। इंफ्रारेड कैमरों से देखने पर यह बैकग्राउंड इमेज के अनुरूप ही नजर आएगा। मेटातत्व कंपनी के एमडी व सीईओ और पूर्व एयर वाइस मार्शल प्रवीण भट्ट ने बताया कि आधुनिक मानदंडों से तैयार इस उत्पाद को एक साल के अंदर सेना की जरूरत के अनुरूप उपलब्ध कराया जा सकता है।