कानपुरः इलाहाबाद बैंक के बाद कोठारी पर बैंकों की दरियादिली की एक और बानगी देखिए। इंडियन ओवरसीज बैंक ने भी इन पर खुले हाथ से जनता की जमापूंजी लुटाई। चार साल तक आंख बंद करके लोन दिया गया और पांचवें साल से लोन की किस्तें जमा होना बंद हो गईं। छठवें साल में खाते एनपीए हो गए।
रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का एक लोन एकाउंट माल रोड स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक में भी है। वर्ष 2010 में यह लोन एकाउंट महज 150 करोड़ का था। चार साल में ही यानी वर्ष 2014 में यह 1400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। चार साल के भीतर 1250 करोड़ रुपये लोन और दिया गया।
इस बात से बेखबर कि दिए गए लोन की वसूली हो भी पाएगी या नहीं। बैंकों के सूत्र बताते हैं कि इस भारी भरकम रकम के बदले महज सौ करोड़ रुपये की संपत्ति ही बंधक रखी गई। समय पर लोन की किस्तें अदा न हो पाने पर जून 2016 में कोठारी के लोन खाते एनपीए हो गए। हालांकि बैंक ने औपचारिकता करते हुए कई नोटिस भेजे, लेकिन न तो मूलधन जमा हुआ और न ही ब्याज। बाद में बैंक ने सिक्योरिटी के तौर पर जमा एफडीआर जब्त कर ली।