यूपी के उन्नाव जिले में प्रत्येक महीने अज्ञात शवों की संख्या बढ़ती जा रही है। पुलिस हाईवे किनारे पड़े व नहर में बहकर आने वाले शवों की पहचान नहीं करा पाती। एक शव को 72 घंटे रखने के निर्देश हैं। शव रखने का उचित प्रबंध न होने से परेशानी बढ़ती जा रही है। मुर्दाघर में दुर्गंध फैलने से वहां तैनात कर्मचारियों के अलावा आसपास रहने वाले लोगों को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है।
मुर्दाघर में हर महीने अज्ञात शवों की संख्या में इजाफा होता है। यह वह शव हैं जो हाईवे किनारे पड़े मिले या फिर नहर में बहकर आए। इनकी शिनाख्त नहीं हो पाई और उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। लखनऊ-कानपुर हाईवे के अलावा नहरों में आए दिन कोई न कोई शव मिलता ही रहता है। सूत्रों की माने तो नहरों में जो भी शव बहकर आते हैं वह अक्सर हत्या करके ही फेंके जाते हैं।
पुलिस उनका पोस्टमार्टम कराने से बचने के लिए अपने थानाक्षेत्र की सीमाएं पार कराया करती है। इससे गैर जिले के शव आकर यहां झाड़ियों में फंसते हैं। काफी दिनों के शव होने से चेहरा भी पहचान में नहीं आता। पुलिस को जब शव झाड़ियों में मिलता है तो वह निकलवाकर मुर्दाघर में रखवाती है और 72 घंटे का इंतजार करती है। डीप फ्रीजर की व्यवस्था न होने से शव सड़ा करते हैं। इससे दुर्गंध फैल जाती है।