बैराज में पानी बढ़ने से कटरी वालों को बकरियां चराने के लिए नाव से लेकर आना-जाना पड़ता। इन्हें पकड़ने के लिए मशक्कत भी करनी पड़ती है।
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कानपुर। बैराज के इस पार (शहर की ओर) गंगा का जलस्तर शनिवार दोपहर 113.32 मीटर पहुंच गया। खतरे का निशान 114 मीटर है। रात तक पानी 40 सेंटीमीटर और चढ़ जाने की आशंका है। ऐसे में पानी खतरे के निशान तक पहुंच सकता है। कटरी के गांवों से पलायन शुरू हो गया। तीन परिवार गृहस्थी लेकर नावों से सुरक्षित स्थानों पर चले गए। सेना भी ग्रामीणों के भी संपर्क में है।
कटरी के देवनीपुरवा, घारमपुरवा, चैनपुरवा, कटरी शंकरपुर सरांय के बाहर तक पानी पहुंच गया है। देवनीपुरवा के बाहर स्थित कई मीटर ऊंचा टीला डूब गया है। इन गांवों के पप्पू निषाद, विनोद सहित तीन परिवार गृहस्थी का सामान लेकर गांव से चले गए। एसडीएम डीडी वर्मा, तहसीलदार अनिल कुमार सहित अन्य अफसरों ने कटरी जाकर स्थिति का जायजा लिया। देवनीपुरवा के रवि निषाद ने बताया कि जिला प्रशासन ने चौकसी के नाम पर दो दिन पहले सिर्फ डुग्गी पिटवाई थी। प्राथमिक विद्यालय में बाढ़ चौकी खुलना तो दूर, वहां पहले से ही अवैध कब्जा है। इसी प्रकार गुलाब देवी ने बताया कि बाढ़ के मद्देनजर राशन की व्यवस्था कर ली है। श्याम बाबू ने बताया कि एक मीटर पानी और बढ़ने पर उसे घर छोड़कर जाना पड़ेगा।
बाढ़ से राहत के बंदोबस्त में चूक न हो : कमिश्नर
कमिश्नर मो. इफ्तेखारुद्दीन ने बाढ़ से राहत के बंदोबस्त की समीक्षा करते हुए कहा कि इसमें कोई चूक न हो। किसानों के नुकसान के मुआवजे के लिए सर्वे रिपोर्ट समय से तैयार कर ली जाए। कैंप दफ्तर में बैठक में कमिश्नर ने बताया कि मंडल में 2.50 लाख किसानों ने फसल का बीमा कराया है। एडीएम फाइनेंस शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि कानपुर में तीन गांव बाढ़ से ज्यादा प्रभावित होते हैं। इनमें राहत कार्य की तैयारी पूरी कर ली गई है। कानपुर देहात के एडीएम ने बताया कि 29 बाढ़ चौकी और दो शरणार्थी गृह बनाए गए हैं।