इंटरनेशनल रैंकिंग, शैक्षिक और रिसर्च क्वालिटी में सुधार के लिए आईआईटी कानपुर ने विदेशी स्टूडेंटों की सीटें बढ़ाने का फैसला किया है। इस पर डीन कमेटी ने काम शुरू कर दिया। शैक्षिक सत्र 2016-17 से विदेशी स्टूडेंटों के एडमिशन की नियमावली भी बदली जाएगी। नियम को सरल बनाया जाएगा।
दुनिया की शीर्ष यूनिवर्सिटी और प्रौद्योगिकी संस्थानों की क्यूएस रैंकिंग में आईआईटी कानपुर टॉप-200 से बाहर है। आईआईटी की क्यूएस रैंकिंग 271वीं है, जो आईआईएससी बंगलूरू के 147 और आईआईटी दिल्ली के 179वीं रैंक से कम है। 2014 में आईआईटी कानपुर का नाम इन शैक्षिक संस्थानों से ऊपर था।
इसी को देखते हुए ही आईआईटी प्रशासन ने पूरी व्यवस्था में सुधार का फैसला किया। साथ ही ग्लोबल रैंकिंग कमेटी बनाकर उसका कोआर्डिनेटर प्रो. संदीप वर्मा को बना दिया। निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना का कहना है कि विदेशी स्टूडेंटों के लिए पीजी में 34 सीटें हैं लेकिन एडमिशन की सख्त नियमावली के कारण ज्यादा विदेशी स्टूडेंट नहीं आ सके।
अब अंडर ग्रेजुएट (यूजी) और पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) स्तर की सीटें बढ़ाने का फैसला हुआ है। डीन कमेटी का काम चल रहा है। जल्द ही रिपोर्ट आएगी, फिर सीनेट की अनुमति लेकर सत्र 2016-17 से विदेशी स्टूडेंटों के रहने, खाने, पढ़ने और रिसर्च की अच्छी व्यवस्था की जाएगी। बताते चलें कि अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में विदेशी स्टूडेंटों के एडमिशन, रिसर्च का मानक देखा जाता है।