उत्तर प्रदेश में कानपुर के शताब्दी प्लाई और दरवाजा बनाने वाली बावा फ्लोट ग्लास लिमिटेड व इनकी दिल्ली की सहयोगी कंपनी लक्ष्मी फ्लोट ग्लास लिमिटेड के मालिकों की अचल संपत्तियों की कीमत उनकी हैसियत से कई गुना अधिक है। कालाधन छिपाने के लिए कारोबारियों ने बेशकीमती जमीनों की कीमत कौड़ियों के भाव दिखाई है, जबकि भुगतान सर्किल रेट से कहीं अधिक मूल्य पर किया गया है। आयकर विभाग अब इन संपत्तियों का बाजार भाव के हिसाब से मूल्यांकन कराएगा।
आयकर विभाग के सूत्र बताते हैं कि नोटबंदी के दौरान कारोबारियों के पास बेहिसाब नकदी थी। यह नकदी साझीदार कंपनियों, खरीदारों और आपूर्तिकर्ताओं से एडवांस में ली गई थी। इसी दौरान कई संपत्तियों का सौदा किया गया। बताते हैं कि दस्तावेजों में खरीदी गई जमीनों की कीमत सर्किल से 40 से 60 फीसदी तक कम दिखाई गई। अफसरों ने अब जांच में जमीन के विक्रेताओं को भी शामिल किया है। इनसे सर्किल रेट से कम में जमीन बेचने का कारण पूछा जाएगा।
इनके बैंक खातों का ब्यौरा जुटाया जा रहा है। आयकर अफसरों को सूचना है कि जिन संपत्तियों की कीमत कौड़ियों के भाव दिखाई गई है, उनका भुगतान सर्किल रेट से कई गुना अधिक किया गया है। नकद रुपया कालेधन के रूप से दिया गया है। अब तक की जांच में आयकर अफसरों को इनके पास से 50 से अधिक अचल संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए हैं।
चार दिन चली जांच
बावा फ्लोट ग्लास लिमिटेड और लक्ष्मी फ्लोट ग्लास लिमिटेड के ठिकानों पर आयकर विभाग की जांच चौथे दिन शनिवार को पूरी हुई। शनिवार सुबह अफसरों ने प्रतिष्ठानों को खाली कर दिया। यह छापामार कार्रवाई प्रधान आयकर निदेशक (जांच) अमरेंद्र कुमार के निर्देश पर हुई थी। 250 से ज्यादा अफसरों ने इस कार्रवाई को अंजाम तक पहुंचाया। दोनों समूहों के कानपुर, दिल्ली, इलाहाबाद, नोएडा, गाजियाबाद, देहरादून स्थित 23 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा गया था।