काकादेव के मयंक अवस्थी का सिविल लाइंस में वेब डिजायनिंग का काम है। ज्यादातर कैश पर काम होता है। नोटबंदी के बाद कैश मिलना बंद हो गया। स्टाफ को तनख्वाह देने में परेशानी आई तो उन्होंने ई-वॉलेट का सहारा लिया। उनका स्टाफ भी ई-वॉलेट का इस्तेमाल करता है। गुरुवार को मयंक ने अपने स्टाफ को ई-वॉलेट के जरिए तनख्वाह ट्रांसफर की। मयंक ने बताया वह जहां रहते हैं वहां किराने की दुकान वाला ई-वॉलेट से पेमेंट लेता है। इससे घर का सामान खरीदने में उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई।
दिया जा रहा बढ़ावा
नोटबंदी के बाद ई-वॉलेट का चलन बढ़ गया है। इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसियेशन ऑफ इंडिया और पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया ने इसे बढ़ावा देने के लिए प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया है। नवीन मार्केट, सोमदत्त प्लाजा में दुकानदारों के पास उनकी यूनियनों की तरफ से ई-वॉलेट से जुड़ने और ग्राहकों को जोड़ने की अपील की जा रही है। वे ऐप भी बताए जा रहे हैं जिनसे किराना, मोबाइल रिचार्ज, स्कूल फीस, घर का किराया, दवा बिल, ऑनलाइन खरीदारी, होटल बिल, टैक्सी का किराया, केबल रिचार्ज, सब्जी के बिल चुकाए जा सकते हैं।
क्या है ई-वॉलेट
कैशलेस भुगतान के लिए वर्तमान में चलन में आए कई ऐप में इलेक्ट्रानिक वॉलेट (बटुआ, पर्स) की सुविधा होती है। यह आपके बैंक खाते से जुुड़ा होता है। बैंक खाते से आप ऑनलाइन ई-वॉलेट में पैसा भर सकते हैं। इसे किसी के भी ई-वॉलेट में ट्रांसफर किया जा सकता है। इसमें एटीएम के पिन की तरह पासवर्ड होता है। मोबाइल नंबर आपकी आईडी की तरह काम करता है।
ई-वॉलेट से ऐसे करे भुगतान
मोबाइल एप अपने एंड्रायड फोन पर डाउनलोड करें
उसके ई-वालेट को अपने बैंक खाते से जोड़ें और वालेट में रकम ट्रांसफर करें
20 हजार रुपये प्रतिमाह तक ई-वालेट का भुगतान किया जा सकता है।
व्यवसायी ऐसे जुड़े ई-वॉलेट से
एप डाउनलोड कर सेवा प्रदाता कंपनी को केवाईसी फार्म भरकर दें। यूजरनेम-पासवर्ड बनाएं।
इससे बड़ी धनराशि का भी आदान-प्रदान किया जा सकता है
कई कंपनियां ई-वॉलेट से लेन-देन पर कैशबैक जैसे ऑफर दे रही हैं।
आरबीआई द्वारा प्रमाणित
वोडाफोन एम पैसा, स्पाइस मनी, रूपे, रुपईज, क्विक सिल्वर, क्विक वॉलेट, पेटीएम, पेयू मनी, एयरटेल मनी, मोबीक्विक, आक्सीजन वॉलेट, पे पाल, इंडियामार्ट, आइडिया मनी, फ्रीचार्ज आदि।
मोबाइल खोने, चोरी होने पर हो सकता है नुकसान
ई-वॉलेट एप मोबाइल पर चलाया जाता है इसलिए मोबाइल खोने या चोरी हो जाने की स्थिति में ई-वॉलेट का गलत इस्तेमाल हो सकता है। इसलिए पासवर्ड ऐसा होना चाहिए जो आसानी से तोड़ा न जा सके ।
धोखाधड़ी से कैसे बचें
सीओ क्राइम विवेक त्रिपाठी के मुताबिक मोबाइल, कंप्यूटर या लैपटाप पर ट्रांजक्शन करते हुए सावधानियां बरतनी चाहिए। पासवर्ड अनोखा होना चाहिए जिसमें कैपिटल लेटर, संख्या, चिह्न (हैश) हो। जन्मतिथि, शादी की सालगिरह, वाहन नंबर, मकान नंबर को पासवर्ड न बनाएं।