जानलेवा कोरोना से जंग के एकमात्र मजबूत हथियार टीकाकरण के शुरुआती दो चरणों पर दूसरी लहर तूफान की तरह हावी हुई है। पहले चरण में फ्रंट लाइन और हेल्थ वर्कर का तो जैसे-तैसे वैक्सीनेशन हो गया, पर आम जनता की बारी आई तो सारे बंदोबस्त और दावों की एक-एक कर पोल खुलने लगी। शुरुआत में लोग हिचके। कोरोना का हमला तेज हुआ और लोग आगे आए तो व्यवस्था पीछे हटने लगी।
वैक्सीन की कमी और केंद्रों के निर्धारण में कुप्रबंधन का नतीजा यह रहा कि अब तक फ्रंट लाइन वर्करों समेत कुल दो लाख 52 हजार 682 लोगों को ही वैक्सीन लग सकी है। यह आंकड़ा लक्ष्य के मुकाबले 51 से 52 फीसदी के बीच बैठता है। इस तरह लगभग 55 लाख की आबादी वाले जिले में महज 4.59 फीसदी लोगों का ही टीकाकरण हो पाया है। 45 साल से अधिक आयु के लोगों के टीकाकरण और कोरोना दूसरी लहर का कहर आगे-पीछे ही चला।
टीकाकरण शुरू होते ही कोरोना से मौतों और संक्रमित मरीजों के मिलने का सिलसिला तेज हुआ तो लोगों को लगा कि जल्द से जल्द टीका लगवाने में ही भलाई है। नतीजा भीड़ बढ़ना शुरू हुई। कुछ केंद्रों पर आवंटित डोज से चार से पांच गुना अधिक लोगों के पहुंचने से अव्यवस्था फैलने लगी तो कुछ पर आधे भी नहीं पहुंचे।
कुप्रबंधन की इससे बड़ी नजीर और क्या होगी कि अपने आसपास के केंद्रों को छोड़कर बड़े अस्पतालों में लक्ष्य से कई गुना अधिक लोग उमड़े। इससे हंगामा-प्रदर्शन भी हुए। यही वजह रही कि स्वास्थ्य विभाग अपेक्षित लक्ष्य से काफी पीछे रह गया। हालांकि, अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. जीके मिश्रा का कहना है कि टीकाकरण के लिए जिलों से जितनी डिमांड भेजी जा रही है, उन्हें उपलब्ध करा रहे हैं।