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Kanpur News: छह माह में डीएपी से 11 हजार मीट्रिक टन ज्यादा बिक गई एनपीके

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कानपुर। जिले में अप्रैल से सितंबर तक डीएपी की कमी से किसानों को परेशान होना पड़ा। खरीफ की बोआई के समय कई सहकारी समितियां बंद रहीं तो कई में डीएपी नहीं मिली। ऐसे में 1350 रुपये प्रति बोरी मिलने वाली डीएपी के बजाय किसानों को 1850 रुपये में एनपीके खाद की बोरी खरीदनी पड़ी। डीएपी की कमी के चलते 11 हजार मीट्रिक टन एनपीके अधिक बिक गई जबकि खरीफ फसलों में डीएपी की ज्यादा जरूरत होती है। हालांकि इस दौरान सबसे ज्यादा 52,226 मीट्रिक टन यूरिया की भी बिक्री हुई।
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जिले में कुल 87 सहकारी समितियां और 54 एग्री जंक्शन केंद्र संचालित हैं जबकि करीब 613 निजी दुकानें हैं। खरीफ सीजन में जिले के 10 ब्लाॅकों में सहकारी समितियों की संख्या कम होने के कारण खाद के लिए सुबह से ही किसानों की लाइन लग जाती थी।

जिले में अप्रैल से सितंबर तक एनपीके की बिक्री 34,342 मीट्रिक टन हुई जबकि डीएपी 22,792 मीट्रिक टन ही बिक सकी। वर्तमान में समितियों पर किसानों की भीड़ घट गई है। अब रबी सीजन की फसलों की बोआई की तैयारी शुरू हो गई है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 40 प्रतिशत किसान गेहूं की बोआई के लिए खरीद डीएपी चुके हैं इसलिए खरीफ सीजन में डीएपी खाद की ज्यादा मांग बढ़ गई थी। जिले में पर्याप्त मात्रा में स्टॉक है।
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डीएपी ढाई गुना और एनपीके की दोगुना बिकी

जिले में खरीफ के सीजन में सबसे ज्यादा यूरिया खाद लक्ष्य से दो गुना बिक गई। इसका लक्ष्य 34,256 मीट्रिक टन था लेकिन बिक्री 52,226 मीट्रिक टन हुई। डीएपी का लक्ष्य 9,005 मीट्रिक टन था लेकिन बिक्री 22,792 मीट्रिक टन हुई। एनपीके का लक्ष्य 16,100 मीट्रिक टन था और इसकी बिक्री 34,342 मीट्रिक टन तक पहुंच गई।

क्या होती है एनपीके खाद

एनपीके नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश खाद का मिश्रण होता है। यह बाजरा, ज्वार, धान, दलहन, तिलहन आदि फसलों में प्रयोग की जाती है। यह पौधों को भोजन, विकास और रोगों से लड़ने की क्षमता देती है। मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है। डीएपी में नाइट्रोजन और फास्फोरस होता है। यह बीज बुआई के समय जड़ों की वृद्धि में फायदेमंद होती है।

वर्जन-
डीएपी की उपलब्धता कम होने के कारण एनपीके की ज्यादा बिक्री हुई। कई किसान एनपीके की मांग भी करते हैं। जिले में रबी सीजन के लिए 240 मीट्रिक टन डीएपी और 16,522 मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है। एक सप्ताह में डीएपी आ जाएगी। - प्राची पांडेय, जिला कृषि अधिकारी
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