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IIT कानपुर सुसाइड केसः पिता ने रोते-रोते बताई बेटे की इच्छाएं, बचपन का साथी बोला...

Fri, 20 Apr 2018 12:36 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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आत्महत्या करने वाले छात्र के भाई और दोस्त - फोटो : अमर उजाला
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फरीदाबाद (हरियाणा) निवासी और आईआईटी कानपुर से पीएचडी कर रहे छात्र भीम सिंह की आत्महत्या ने घरवालों को झकझोर कर रख दिया है। नौ घंटे का सफर तय कर गुरुवार सुबह करीब आठ बजे आईआईटी पहुंचे पिता ने रोते-रोते बताया कि बेटे भीम ने कहा था कि वह बड़ा वैज्ञानिक बनकर दिखाएगा। जिस बेटे का वे यहां एडमिशन कराने आए थे अब उसी का शव लेकर जाना पड़ेगा।
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भीम के 68 वर्षीय पिता करण सिंह ने कहा कि इतना दिलदार और होशियार बेटा खो दिया, यकीन ही नहीं होता। परिवार को उससे बहुत उम्मीदें थीं। रूंधे गले से बताया कि पिछले साल ही बेटे से मिलने यहां आए थे।


साथ में आए बड़े भाई कैलाश सिंह ने बताया कि मंगलवार की शाम को ही भीम से उन्होंने बात की थी। तीसरे नंबर के भाई होशियार की शादी को लेकर उससे चर्चा हुई थी। होशियार की शादी के लिए भीम ने ही बायोडाटा बनाया था। कैलाश ने बताया कि पोस्टपार्टम के बाद शव लेकर फरीदाबाद स्थित अपने मूल निवास जाएंगे। वहीं अंतिम संस्कार करेंगे।
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बचपन का साथी बोला, दिलदार था मेरा दोस्त

भीम की फाइल फोटो
बचपन का साथी बोला, दिलदार था मेरा दोस्त
पिता और भाई के साथ भीम के बचपन के दोस्त अमित शर्मा भी आईआईटी पहुंचे। अमित और भीम ने स्कूलिंग से लेकर एमटेक तक की पढ़ाई साथ में की थी। बताया कि भीम दिलदार दोस्त था। दो दिन पहले ही फोन पर बात हुई थी। काफी अच्छे मूड में था। अमित ने बताया कि भीम शुरू से ही पढ़ाई में तेज था। वह मैट्रोलॉजी में रिसर्च करना चाहता था। 16-17 मार्च को अमित, भीम, चिराग पाराशर और लोकेश सूर्यवंशी जयपुर घूमने भी गए थे। अमित बताते हैं कि व्हाट्सएप पर भीम से अक्सर चैटिंग होती थी।

कोई कमी नहीं थी
भीम के पिता करण सिंह एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट के क्लर्क पद से रिटायर हैं। करण के चार बेटे और दो बेटियां हैं। बेटों में कैलाश सिंह सबसे बड़े हैं। वे खुद का बिजनेस करते हैं। फिर उदय सिंह, होशियार सिंह और सबसे छोटे भीम सिंह थे। उदय और होशियार भी जॉब करते हैं। होशियार माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैं। बेटियों में ममता की शादी हो चुकी है, जबकि रूबी पढ़ाई कर रही है। करण सिंह ने बताया कि परिवार में किसी चीज की कमी नहीं थी। भीम ने जो मांगा, उसे दिया गया। उसे स्कॉलरशिप भी मिली हुई थी। 

मां का रो-रोकर बुरा हाल
कैलाश ने बताया कि भीम की मौत की खबर सुनकर मां राजवती अचेत हो गईं। उनका रो-रोकर बुरा हाल है। उन्हें संभालने के लिए भाई उदय और बहनें घर पर हैं।
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