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स्वच्छता सर्वेक्षण में कानपुर शहर की रैंकिंग में आया सुधार, ये हैं आंकड़े 

Sun, 24 Jun 2018 04:16 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

देश में 65वें व प्रदेश में चौथे स्थान पर कानपुर  
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डेमाे पिक
स्वच्छता सर्वेक्षण-2018 के तहत शनिवार को जारी की गई रैंकिंग में कानपुर ने लखनऊ को पछाड़ते हुए 65वीं रैंक प्राप्त की। यह सर्वे 4203 शहरों में हुआ था। पिछले साल देश के 665 शहरों में हुए सर्वे में कानपुर 175 वें स्थान पर था।






 
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मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अरबन अफेयर्स ने जनवरी से अप्रैल तक देश के 4203 शहरों में स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत टीमें भेजीं। इन टीमों ने साफ सफाई, निजी से लेकर सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति, खुले में शौच मुक्त की स्थिति, कूड़ा उठान, कूड़ा निस्तारण, शहर में विकास कार्यों, सीवरेज सिस्टम व जलापूर्ति व्यवस्था के बाबत शहरवासियों से राय ली थी।
4000 अंकों के इस सर्वेक्षण में अपने शहर को 2770.5 अंक मिले। 3052.03 अंक के साथ वाराणसी प्रदेश में पहले स्थान पर रहा, जबकि गाजियाबाद दूसरे, झांसी तीसरी और कानपुर चौथे स्थान पर रहा। लखनऊ 115वें स्थान पर है। पूर्व नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने बताया कि उनके कार्यकाल में शहर में स्वच्छता के मामले में हुए विशेष कार्यों, शहर के खुले में शौच मुक्त होने, कूड़ा निस्तारण प्लांट चलने आदि वजहों से शहर की रैंकिंग में सुधार हुआ है। 
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स्वच्छता सर्वेक्षण में देश के टाप-10 शहर

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शहर का नाम            4000 अंकों के सर्वेक्षण में मिले अंक
इंदौर                            3707
भोपाल                        3689
चंडीगढ़                        3649
नई दिल्ली                    3597
विजयवाड़ा                    3580
त्रिरुपति                        3576
विशाखापट्टनम            3547
मैसूर                            3540
नवी मुंबई                    3536    

इस सर्वेक्षण में आगे रहे प्रदेश के टाप 10 शहर

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शहर का नाम    देश में रैंक        4000 अंकों के सर्वेक्षण में मिले अंक
बनारस                 29                    3052.03
गाजियाबाद           36                    2992.68
झांसी                   60                    2805.31
कानपुर                 65                    2770.50
आगरा                 102                    2578.30
लखनऊ                115                2500.98
लोनी                    153                2291.06
अलीगढ़                173                2187.94
इटावा                   189                2116.09
गोंडा                     228            1944.05


 
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कूड़ा निस्तारण व्यवस्था लचर होने पर कटे नंबर

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शहर में हर घर में गीला और सूखा कूड़ा अलग - अलग करने, नियमित रूप से कूड़ा उठान न होने, कूड़ा निस्तारण प्लांट में कूड़े के पहाड़ और निस्तारण व्यवस्था दुुरुस्त न होने से शहर के नंबर कट गए, वरना कम से कम झांसी को पछाड़कर प्रदेश में तीसरा नंबर तो आ ही जाता। देश में भी रैंकिंग और सुधरती।

 
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देश में नंबर-1 आने के लिए इन प्रयासों की जरूरत

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- प्रत्येक घर से नियमित रूप से गीला और सूखा कूड़ा अलग - अलग उठे
- दोनों तरह के कूड़े को लोग अलग - अलग कंटेनरों, कांपेक्टरों या ट्रकों में ठीक से ढक्कर कूड़ा निस्तारण प्लांट तक ले जाया जाए
- गीले कूड़े से जैविक खाद, सूखे कूड़े से बिजली, इंटरलाकिंग टाइल्स बनाए जाएं
- जगह की उपलब्धता के आधार पर हर घर में शौचालय और मोहल्ला, बस्ती स्तर पर पर्याप्त संख्या में सार्वजनिक शौचालय बनवाए जाएं। शौचालयों की नियमित रूप से भलीभांति सफाई हो
- गंगा को प्रदूषित कर रहीं और सीवर सिस्टम को चोक कर रही पतली पॉलीथिन पूर्णतया प्रतिबंधित हो
- सीवर सिस्टम के लिए नासूर बने चट्टे शहर से बाहर हों
- छुट्टा जानवर शहर से बाहर हों
- इंदौर की तर्ज पर बाजारों में रात्रिकालीन सफाई हो, फुटपाथ की धुलाई, पेड़ों पर पानी डाला जाए
- इंदौर की तर्ज पर सैलून से निकलने वाले बालों का भी उपयोग हो
- शहरवासी सफाई के बाद सड़कों पर कूड़ा न फेंकें
- स्वच्छ एटीएम का भरपूर उपयोग हो
- मूलभूत समस्याओं के संबंध में नगर निगम कंट्रोल रूम में शिकायत करते ही निस्तारण हो
- शहरवासियों को सफाई के लिए निरंतर जागरूक किया जाए
- शहर में खुले में शौच मुक्त के लिए लगातार प्रयास होते रहें। 
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