कानपुर शहर के आसपास के गांवों में मिट्टी का अवैध खनन रात-दिन धड़ल्ले से जारी है। खनन माफिया पुलिस और अधिकारियों से साठगांठ कर जमीन को छलनी करने में जुटे हैं। ये माफिया सत्ताधारी तीन नेताओं की सरपरस्ती में खनन करवा रहे हैं। किसानों के खेत तालाब बन गए हैं। चार फीट के अनुबंध पर 40-40 फीट तक खुदाई कर मिट्टी निकाली जा चुकी है। किसान विरोध करता है तो डराकर, धमकाकर शांत करा दिया जाता है। जिम्मेदार हैं कि सबकुछ जानकर भी अनजान बने हैं।
विज्ञापन
पंडितजी की तिकड़ी के पास सारी जिम्मेदारी
सत्ताधारी दो नेताओं ने चौबेपुर, बिठूर और बिल्हौर में पंडितजी की तिकड़ी को सारा काम सौंप रखा है। या यूं कहें नेताओं ने खनन का ठेका लेकर इस तिकड़ी को पूरी जिम्मेदारी दे रखी है। तिकड़ी में सिंहपुर के एक त्रिपाठी और कल्याणपुर के मिश्रा और दुबे शामिल हैं। खनन से लेकर मिट्टी पहुंचाने और रकम वसूलने की जिम्मेदारी इन्हीं तीनों की है।
बिधनू में ब्लॉक प्रमुख का रिश्तेदार सक्रिय
बिधून में भी एक सत्ताधारी नेता के संरक्षण में अवैध खनन जारी है। शासन का आदेश इस नेता के लिए कोई मायने नहीं रखता। नेता ने एक ब्लॉक प्रमुख को संरक्षण दे रखा है। यादव बंधु अवैध खनन करवाकर पैसा वसूल रहे हैं और रकम ऊपर तक पहुंचा रहे हैं।
विज्ञापन
नीचे से लेकर ऊपर तक बंटता है पैसा
महाराजपुर और नर्वल में भी सालों से खनन
महाराजपुर और नर्वल के आधा दर्जन गांवों में भी कई सालों से खनन जारी है। यहां एक सत्ताधारी नेता का साला अपने साथियों के साथ मिलकर खनन करवाता है। नेता के रौब के चलते ग्रामीण भी चुप्पी साधे हैं। उन्हें भी धमकियां दी जाती हैं। यही वजह है कि किसान अवैध खनन की शिकायत तक नहीं करते हैं।
नीचे से लेकर ऊपर तक बंटता है पैसा
खनन से होने वाली करोड़ों की कमाई का 25-30 फीसदी हिस्सा नेताओं तक पहुंचता है। नाम न छापने की शर्त पर एक खनन माफिया ने बताया कि नेताओं को भी हिस्सा देना पड़ता है। नीचे से लेकर ऊपर तक इतना पैसा बंट जाता है कि उन्हें अनुबंध से कई गुना ज्यादा खुदाई करनी पड़ती है।
एक नेता के खनन का साम्राज्य चारों तरफ
पुलिस भी प्रभाव में, एलआईयू खामोश
कई मामलों की शिकायतें भी थानों में पहुंची हैं। हैरानी की बात है कि पुलिस ने किसी तरह की कार्रवाई करने की जद्दोजहद नहीं उठाई। वहीं प्रशासन के अधिकारियों को भी खनन व उसके पीछे शामिल लोगों के बारे में जानकारी है लेकिन वह भी चुप्पी साधे हैं। एलआईयू को भी एक-एक खनन माफिया के बारे में जानकारी है लेकिन वह भी इस पर जहमत नहीं उठा रही है।
एक नेता के खनन का साम्राज्य चारों तरफ
तीन नेताओं में एक नेता का खनन का साम्राज्य शहर के चारों तरफ फैला है। बिठूर, चौबेपुर हो या फिर बिधनू और महाराजपुर, इन सभी जगहों के खनन माफियाओं पर इस नेता की मेहरबानी है। इस मेहरबानी के एवज में नेताजी मोटी रकम वसूलते हैं। जरूरत पड़ने पर नेताजी खनन माफियाओं के समर्थन में पुलिस से लेकर प्रशासन तक पैरवी करने से भी पीछे नहीं हटते।
इन गांवों में खनन
चौबेपुर व बिठूर के टिक्कनपुरवा, बरहट बांगर, टिकरा, चौधरीपुर सहित बिल्हौर के एक दर्जन गांवों में खनन हो रहा है। वहीं बिधनू, महाराजपुर व नर्वल के गडेवा, ओरियारा, बघारा, जामू, मझावन, शिवगंज चौराइ, संभुआ, कठारा, नगवां, सेन, फत्तेपुर, कुरौना, साहपुर, भारू, मगरासा, धौरीबगहा, ओरछी आदि गांव में दिन रात खनन जारी है।
नेताओं के साथ कई कथित पत्रकार भी शामिल
खनन में नेताओं के साथ कई कथित पत्रकार भी शामिल हैं। जब कभी खनन से संबंधित थाने में कोई कार्रवाई होती या कोई पकड़ा जाता है, तो कथित पत्रकार भी उनकी पैरवी में पहुंचते हैं। जानकारी के मुताबिक कई गांवों में कथित पत्रकारों की सीधे खनन माफियाओं से साठगांठ है।