यूपी के अकेले घाटमपुर तहसील क्षेत्र के गांवों में ही नहीं कानपुर से सटे ग्रामीण क्षेत्रों की भी परचून की दुकानों में जहरीली शराब बेची जा रही है। नौ मार्च से शुरू हुए मौतों के सिलसिले के बाद भी पुलिस और आबकारी विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसी का नतीजा रहा कि मंगलवार को तीन और लोगों की मौत हो गई। इन लोगों ने भी परचून की दुकान से शराब खरीदकर पी थी।
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साढ़ के सुखइयापुर के ग्रामीणों ने बताया कि देशी शराब ठेके के सेल्समैन राहुल के चाचा सुरेश और भाई राजू की गांव में परचून की दुकानें हैं। दोनों सात-आठ साल से दुकान से ही शराब बेच रहे थे। इसी तरह भीतरगांव के खदरी गांव में विमल भी परचून की दुकान से शराब बेच रहा था। उसे मकान मालिक ओमी शराब की सप्लाई करता था।
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ओमी ने आसपास के कई गांवों तक अपना जाल बिछा रखा था। वही परचून दुकानदारों को शराब सप्लाई करता था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट तो दर्ज कर ली है लेकिन चार दिन बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। मंगलवार को जहरीली शराब से मृत परचून दुकानदार खदरी का रामशंकर भी अपनी दुकान से शराब बेचता था।
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पाउच में बिकती है शराब
सूत्रों के मुताबिक गंगा कटरी से लगे शेखपुर, जाना, नयाखेरा, किशुनपुर, सुवंशीखेड़ा, भगवंतनगर, नरायनपुर, रहनश, बिपौसी, कमालपुर, बगहा, खरौंटी, देवसानखेड़ा, गौशाला, दिबियापुर व बाजखेड़ा गांव में शाम होते ही भट्ठियां धधकने लगती हैं। सूरज निकलने से पहले इन भट्ठियों को बुझा दिया जाता है।
नर्वल के पारा, गंगभेव, पाली ककराली, खुझौली, सेमरूवा, सवाइजपुर, करबिगवां, चिरली, कुंदौली, राजेपुर गांव में अवैध रूप से शराब तैयार की जाती है। इसके बाद शराब को पाउच में भरकर परचून की दुकानों और गुमटियों पर बेचा जाता है। फतेहपुर व सचेंडी में केमिकल डालकर तैयार की गई शराब की भी बड़ी मांग है।